मु्स्कान,खबरनाउ: हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के स्नातक प्रथम वर्ष के घोषित परिणामों के खराब रहने के कारणों का पता जांच कमेटी लगा रही है. ऑन स्क्रीन मूल्यांकन प्रक्रिया की जांच कर रही कमेटी की रिपोर्ट पर प्रदेश के हजारों फेल हुए विद्यार्थियों का भविष्य निर्भर करेगा. इसके बाद ही विश्वविद्यालय आगामी निर्णय लेगा. इसमें ही तय होगा कि फेल हुए विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय कृपांक या किसी तरह की कोई राहत देगा या नहीं. जांच कमेटी ने ऑन स्क्रीन मूल्यांकन की प्रक्रिया के लिए रेंडम चेकिंग में कोई विशेष खामी नहीं पाई है. अब कमेटी ने 90 फीसदी से अधिक फेल विद्यार्थियों वाले कॉलेजों की अलग-अलग विषयों की उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
कमेटी दस दिन बाद अपनी रिपोर्ट दे देगी. पहली बार जांची पुस्तिकाओं और पुनर्मूल्यांकन में दिए गए अंकों में बहुत अधिक अंतर रहने पर कमेटी तीसरी बार अलग एग्जामिनर से उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करवाएगी. इसमें और अधिक समय लगना तय है. जांच कमेटी पर्यावरण विज्ञान के शिक्षकों की उपलब्धता न होने के साथ ऐसे कॉलेजों का भी पता लगाएगी, जहां विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए कॉलेजों में शिक्षक ही उपलब्ध नहीं थे. इस जांच कमेटी की रिपोर्ट पर ही निर्भर करेगा कि विश्वविद्यालय में परीक्षा परिणाम को लेकर बार बार होने वाले हंगामे भविष्य में बंद होंगे या नहीं.







