हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने आज सचिव (वन विभाग ), व सरकार के चीफ कंजरवेटर को नोटिस जारी किया,
उच्च न्यायालय ने गोविन्द सागर झील में मलबा के अवैध डंपिंग आदि संबंधित मामले में हिमाचल प्रदेश के मुख्य वन संरक्षक और डीएफओ बिलासपुर, सहायक निदेशक मत्स्य, बिलासपुर, परियोजना निदेशक एनएचएआई- पीआईयू, मंडी और गावर कीरतपुर नेरचौक राजमार्ग प्राइवेट लिमिटेड, को नोटिस जारी किया है जिसमे उनसे यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि गोविंद सागर झील में अवैध रूप से मलबा नहीं डाला जा रहा है और न ही नाले भर रहे हैं
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका में यह आदेश पारित किया
याचिकाकर्ता का आरोप है कि किरतपुर-नेरचौक नेशनल हाईवे को फोर लेन बनाने के दौरान गोविन्द सागर झील में अवैध रूप से मलबा डाला जा रहा है, याचिकाकर्ता ने अधिकारियों को विभिन्न अभ्यावेदन/शिकायतें की हैं लेकिन अधिकारी ऐसे शिकायतकर्ताओं पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। याचिकाकर्ता ने प्रस्तुत किया है कि बिलासपुर और ऊना जिलों में स्थित गोविंद सागर झील जलाशय का नाम 10वें सिख गुरु के नाम पर रखा गया है। इसे 1962 में वाटर फाउल रिफ्यूज घोषित किया गया था। यह झील हिमाचल प्रदेश सरकार का एक महत्वपूर्ण मत्स्य रिजर्व होने के नाते, लगभग 51 प्रजातियों की मछलियों का घर है, जैसे कि सिल्वर कार्प, सिंघारा, महसीर और अन्य जो यहाँ प्रजनन करती हैं।
याचिकाकर्ता ने प्रस्तुत किया है कि एसडीएम बिलासपुर की अध्यक्षता में आठ (8) सदस्यों वाली एक संयुक्त निरीक्षण समिति का गठन उपायुक्त, बिलासपुर द्वारा किया गया था,और कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में गोविन्द सागर झील के पास 10-12 नाले होने का जिक्र किया है। समिति ने पाया कि इन नालों में अवैध रूप से मलबा डाला जाता है और मलबा गोविंद सागर झील तक पहुंच जाता है जिससे मत्स्य विभाग और मछुआरों को भारी नुकसान हो रहा है. जलाशय में अवैध रूप से मलबा डालने से मछली के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है और इसके परिणामस्वरूप मछुआरे अपनी आजीविका कमाने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CIFRI) द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, मछली उत्पादन 2014 में 1492 मीट्रिक टन से घटकर 2022 में 250 मीट्रिक टन हो गया है, मछली उत्पादन में इस भारी कमी ने बुरी तरह प्रभावित किया है,3000 से अधिक स्थानीय परिवारों की आजीविका का स्त्रोत यही है
याचिकाकर्ता ने निवेदन किया है कि प्रतिवादियों को गोविंद सागर झील में डंप किए गए अवैध मलबे को हटाने और उन नालों से भी हटाने का भी निर्देश दिया जाए जहां से पानी गोविंद सागर झील में बहता है,
उन्होंने अनुरोध किया है कि उत्तरदाताओं को निर्देश दिया जाए कि वे अवैध मलबा डंपिंग को रोकने में सक्षम नहीं होने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ जांच शुरू करें, यह भी निवेदन किया है कि गरीब मछुआरों की आजीविका के नुकसान की जांच के लिए जांच का आदेश दिया जाए।
इस बीच, अदालत ने संबंधित विभाग व अन्य उत्तरदाईयो को निर्देश दिया है कि गोविंद सागर झील में अवैध रूप से मलबा नहीं डाला जा रहा है ये सुनिश्चित करें मामले को 12 जून, 2023 के लिए स्थगित कर दिया गया है।







