ब्लाइंड पर्सन एसोसिएशन HP ने राज्यपाल को ज्ञापन दिया उन्होंने कहा कि शिमला के ढली में स्थित विशेष गृह-शिक्षण संस्थान “विशेष योग्यता वाले बच्चों के संस्थान (लड़कों) – Institute for the Children with Special Ability (Boys) के कार्यप्रणाली, वहां के वातावरण और प्रबंधन के आचरण व दिव्यांगता विशेष अध्यापकों की कार्यकुशलता एवं शिक्षा प्रणाली पर गहरे प्रश्न खड़े करता है।
हमारे संगठन को प्राप्त जानकारी के अनुसार, संस्थान के प्रधानाचार्य श्री धर्मपाल राणा द्वारा बीते काफी वर्षों / समय से बच्चों के प्रति भेदभावपूर्ण व अमानवीय व्यवहार अपनाया जा रहा है। आरोप है कि वे योजनाबद्ध कूटनीतियों के माध्यम से ऐसा वातावरण तैयार करते हैं जिससे बच्चे मानसिक रूप से प्रताड़ित हों, और आवश्यकता पड़ने पर मनगढ़ंत आरोपों व षड्यंत्रों के आधार पर उन्हें संस्थान से निष्कासित कर दिया / करने का प्रयास किया जाता है। विशेषकर उन बच्चों को निशाना बनाया जाता है जो संस्थान में हो रही अनियमितताओं, भ्रष्टाचार अथवा कुप्रबंधन के विरुद्ध अपनी बात रखते / आवाज़ उठाने का प्रयास करते हैं। कई मामलों में बच्चों के साथ मारपीट, डराना-धमकाना एवं अन्य छात्रों की मासूमियत का गलत इस्तेमाल कर उनके विरुद्ध उकसाने जैसी अमानवीय विधियों का प्रयोग किया जाता है। उनके इस कृत्य में संस्थान के कुछ एक कर्मियों/अध्यापकों की भी संलिप्ति सूचना प्राप्त होती है व अप्रत्यक्ष तौर पर कहीं न कहीं संस्थान नियंत्रक प्राधिकरण। जबकि कुछ एक अध्यापकों/कर्मियों द्वारा संस्थान के पीड़ित बच्चों के प्रति अगर उनके उपरोक्त कुकृत्यों का विरोध किया जाता है, तो उन व्यक्ति विशेष के प्रति भी उपरोक्त प्रधानाचार्य द्वारा प्रशासनिक स्तर पर कूट नीतियों का इस्तेमाल तथा भेदभावयुक्त व्यवहार किया जाता है।

Oplus_131072
एक सूचनानुसार संबंधित प्रधानाचार्य द्वारा पीड़ित छात्रों की चुप्पी कायम रखने के लिए उन्हें व्यक्तिगत रूप से अकेले अकेले अपने कार्यालय कक्ष में बुलाकर एवं झूठे आरोपों को लगाते हुए, बच्चों के अभिभावकों को पत्राचार कर धमकाया व भावनात्मक ब्लैकमेल किया जात है।
घटना का ताज़ा उदाहरण दृष्टिबाधित अनाथ बालक “बीरपाल”
हाल ही में हमारे संगठन के संज्ञान में आया कि प्रधानाचार्य द्वारा एक षड्यंत्र रचकर, दृष्टिबाधित एवं अनाथ बालक “बीरपाल” को संस्थान से बाहर निकालकर कुल्लू स्थित ‘नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड (NAB)’ के गृह संस्थान में भेज दिया गया। जानकारी के अनुसार, वीरपाल एवं उसके कुछ साथियों ने संस्थान में पधारे अधिकारियों के समक्ष भोजन व अन्य सुविधाओं से संबंधित अनियमितताओं को मौखिक रूप से उजागर किया था। इसके बाद से ही उनके साथ भेदभाव, मानसिक प्रताड़ना एवं झूठे आरोपों का सिलसिला शुरू हो गया। प्राप्त सूचनानुसार उपरोक्त विशेष गृह शिक्षण संस्थान के प्रधानाचार्य द्वारा पीड़ित छात्र बीरपाल को व्यक्तिगत रूप से अपने कार्यालय कक्ष में बुलाया जाता था, व उसे धमकाते हुए यहां तक कहा जाता था कि “तेरे आगे और पीछे कोई नहीं, जो तेरी सहायता कर सके या जो तेरे लिए आवाज उठाएगा”। बाद में उसे एक मनगढ़ंत घटना में गंभीर दोषी ठहराया गया। उसे प्रधानाचार्य द्वारा एक कार्यालय (संभावना है कि बाल कल्याण परिषद कार्यालय, क्रैक गर्दन, शिमला) ले जाया गया। जहां कुछ चुनिंदा छात्रों (प्रधानाचार्य प्रिय) से तैयार उसके विरुद्ध रिकॉर्डेड झूठी वीडियो-गवाही दिखाई गई, जिसमें वे बच्चे उस पर मार पीट के आरोप लगा रहे थे। तभी वहां एक अधिकारी /व्यक्ति विशेष द्वारा बीरपाल को “कुछ दिन बाहर जाने का सुझाव दिया। बीरपाल ने बीते काफी दिनों से संस्थान में उसके साथ हो रहे दुर्व्यवहार व मानसिक प्रताड़ना एवं तनाव के चलते उसने उस अधिकारी के इस वाक्य को इस तरह से लिया कि शायद वे उसे थोड़े दिनों के लिए बाहर घुमाने ले जा रहे हैं, जैसा कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में “मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना” के तहत “चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट” बच्चों के तहत ले जाए जाते हैं। क्योंकि उस दौरान संस्थान में छुट्टियों के चलते बीरपाल को छोड़ कर अन्य बच्चे अपने-अपने घर अभिभावकों के पास चले जाते हैं। इसी बहाने उसकी मासूमियत व दृष्टिबाधिता का फायदा उठाते हुए उन सभी संबंधित आरोपी व्यक्ति विशेष द्वारा उसे उपरोक्त संस्थान से स्थानांतरित कर दिया गया। प्राप्त सूचनानुसार वह नए संस्थ में भी बहुत सहमा हुआ है और बार-बार अपने पुराने संस्थान लौटने की इच्छा व्यक्त करता है।
बीरपाल से बातचीत के दौरान उसके साथ हुए उपरोक्त सभी गतिविधियों, कृत्यों, भेदभाव, मानसिक प्रताड़ना आदि को स्वीकारा। व उसके द्वारा यह भी बताया गया कि आमतौर पर संस्थान में बच्चों को किसी भी प्रकार का मोबाइल फोन रखने की अनुमति नहीं है। जबकि, एक बच्चा (डे-स्कॉलर सह प्रधानाचार्य प्रिय) जो संस्थान में पढ़ाई के लिए केवल दोपहर में आता था, उसके पास मोबाइल होता था और वह उन सभी की बातों को चुपचाप रिकॉर्ड कर, संस्थान के प्रधानाचार्य और अन्य अध्यापकों एवं कर्मचारियों को सुनता था। इससे न केवल बच्चों की निजता का उल्लंघन होता था, बल्कि वे मानसिक उत्पीड़न का शिकार भी होते थे।
यह भी उल्लेखनीय है कि ICSA गृह-शिक्षण संस्थान में बच्चों के पास कोई भी संपर्क साधन नहीं होता है और वहां की सुरक्षा व्यवस्था व उनकी दिव्यांगता के कारण वे बाहरी दुनिया से अपने अनुभव साझा नहीं कर पाते। जिस कारण उन्हें सभी अत्याचारों/प्रताड़नाओं/भेदभावों को अपने तक ही सीमित रखने हेतु बाध्य होना पड़ता है।
हमारे संगठन द्वारा सम्बंधित संस्थान के पुराने छात्रों एवं अन्य सूत्रों से विमर्श करने के पश्चात उपरोक्त समस्त घटनाओं की पुष्टि हुई है। यह स्थिति न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि दिव्यांगजनों की शिक्षा एवं हितों के संरक्षण से संबंधित नीतियों एवं अधिनियमों के मूल भाव के भी विपरीत है।
संस्थान की उच्च-स्तरीय जांच ढली स्थित ICSA संस्थान में बच्चों के साथ हो रहे शारीरिक और मानसिक शोषण, अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की गहन जांच की जाए। यह जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि दोषियों को सजा मिल सके। चाहे वह संस्थान प्रबंधन हो या वहां के कोई व्यक्ति विशेष, या संस्थान पर नियंत्रण रखने वाले सक्षम प्राधिकारी/प्राधिकरण।
प्रधानाचार्य काअविलंब निलम्बन प्रधानाचार्य श्री धर्मपाल राणा को तत्काल उपरोक्त पद से हटाया जाए, ताकि जांच प्रक्रिया में कोई भी अवरोध उत्पन्न न हो सके।
संगठन की उपस्थिति में संपूर्ण जांच- दिव्यांगता सम्बन्धी परिस्थितियों से साधारण
व्यक्ति एवं प्राधिकरण विशेषतः । पूर्णतः परिचित नहीं होती है। व हमारा संगठन और इसका एक एक सदस्य इस क्षेत्र से भली-भांति प्रत्यक्ष तौर पर परिचित है। साथ ही यह मामला संगठन के ध्यान में आया है, व संगठन इस पूर्ण निष्पक्ष कारवाही का स्वयं प्रत्यक्ष साक्षी बनना चाहता है। इत्यादि…
वीरपाल का पुनः स्थानांतरण- वीरपाल को तत्काल ICSA संस्थान, ढली में पुनः वापस भेजा जाए, और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उसके साथ हो रही मानसिक प्रताड़ना और शोषण को पूरी तरह से समाप्त किया जाए।
संस्थान के छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता- संस्थान में सभी बच्चों के लिए मानसिक स्वास्थ्य परामर्श की व्यवस्था की जाए, ताकि वे किसी प्रकार के शारीरिक या मानसिक शोषण का शिकार न हो सकें।
भविष्य में सुरक्षा तंत्र की स्थापना- संस्थान में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु एक स्वतंत्र निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए, जिसमें बच्चों के शिकायत दर्ज करने के लिए एक प्रभावी और सुरक्षित तरीका हो।
संस्थान में व्याप्त अनियमितताओं की व्यापक जांच संस्थान में व्याप्त सभी अनियमितताओं, जैसे भोजन, स्वास्थ्य, उपकरणों, बच्चों के आमोद-प्रमोद से सम्बन्धित योजनाओं और शिक्षा इत्यादि से संबंधित विभिन्न मुद्दों की गहन जांच की जाए।
यह प्रकरण अत्यंत संवेदनशील एवं नाजुक है, क्योंकि यह विशेष योग्यता वाले बच्चों के सम्मान, सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा है। अतः संगठन आपसे विनम्र अनुरोध करता है कि इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर संज्ञान में लेकर शीघ्र व न्यायोचित कार्रवाई सुनिश्चित करने की कृपा करें। संगठन को पूर्ण विश्वास है कि आप इस मामले को अपने निजी संज्ञान में लेंगे व बच्चों के मानवाधिकारों एवं दिव्यांगता विशेष अधिकारों की रक्षा करेंगे।







