संवाददाता,शिमला: हिमाचल प्रदेश में भाजपा की कद्दावर नेता व पूर्व मंत्री रही नाहन की श्यामा शर्मा करीब 70 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गई है। उधर पूर्व मंत्री के नाती भावन शर्मा ने भावुक होते हुए बताया कि उन्हें करीब चार दिनों से लीवर में इन्फेक्शन की शिकायत हुई थी। इसके बाद चंडीगढ़ ले जाया गया, जहां उन्हें चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। उधर भाई सुखदेव शर्मा ने बताया कि पार्थिव देह को चंडीगढ़ से नाहन लाया जा रहा है इसके बाद ही अंतिम संस्कार को लेकर कोई फैसला किया जाएगा।
आपातकाल में पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार के साथ जेल में रही श्यामा शर्मा राजनीति का एक बड़ा सितारा थी। बता दें कि जिला सिरमौर में भाजपा को विशेष पहचान दिलाने और संगठन के लिए उन्होंने बड़े कार्य किए है। श्यामा ने सबसे पहली बार 1977 में नाहन विधानसभा से चुनाव लड़ा था और जीत भी हासिल की थी।
बता दें कि पूर्व में मंत्री रही श्यामा शर्मा देहरादून के डीएवी कॉलेज से एलएलबी किए हुए थी। ना केवल एक कुशल राजनीतिज्ञ बल्कि वह एक कुशल अधिवक्ता भी रही है। श्यामा शर्मा का जन्म 1948 में सरोगा सराहा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत हुआ था। जबकि वह नाहन में ही रही। श्यामा शर्मा ने विवाह नहीं किया था। उन्होंने अपना पहला चुनाव 1977 में लड़ा था तथा 18 मई 1977 में वे खाद्य आपूर्ति विभाग विधि राज्यमंत्री रही।
पूर्व में मंत्री रहीं श्यामा शर्मा भाजपा छोड़कर हिमाचल विकास पार्टी में चली गई थी। उस समय कई भाजपा के नेता हिमाचल विकास पार्टी में शामिल हुए थे। आपको यह भी बता दें कि श्यामा शर्मा व सुषमा स्वराज दोनों गहरी मित्र भी थी और दोनों का राजनीतिक सफर भी 1977 में शुरू हुआ था। यही नहीं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्यामा शर्मा के राजनीतिक से अच्छी तरह वाकिफ थे। अक्सर सिरमौर से दिल्ली जाने वाले नेताओं से श्यामा शर्मा के बारे में जरूर पूछा करते थे।
श्यामा शर्मा के यूं अचानक चले जाने के बाद सियासी गलियारों में जबरदस्त हलचल चल रही है। उनकी अचानक हुई मौत पर पूरे सिरमौर में शोक की लहर है। तो वही खासतौर से उनके समर्थक खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं। हालांकि श्यामा शर्मा दो भाइयों की इकलौती बहन थी एक भाई की कुछ समय पहले मौत हो गई थी। उनका एक भाई सुखदेव शर्मा जो जिला सिरमौर ब्राह्मण सभा के अध्यक्ष भी है वह अकेले रह गए हैं।
नाहन की पूर्व विधायक एवं पूर्व मंत्री श्यामा शर्मा ने 1975 में आपातकाल के दौरान केंद्र सरकार द्वारा बनाए जा रहे पांवटा साहिब के समीप खोदरी माजरी यमुना हाइड्रो प्रोजेक्ट के खिलाफ मोर्चा खोला था। यहां मजदूरों का शोषण होता था। जिसके बाद श्यामा शर्मा ने 1975 में मजदूरों के शोषण के खिलाफ आंदोलन छेड़ा। श्यामा शर्मा के नेतृत्व में मजदूरों ने जमकर आंदोलन किया। इसके बाद सिरमौर पुलिस प्रशासन ने 600 से अधिक मजदूरों को अस्थायी जेल बनाकर बंद कर दिया था।
जेल में कैदियों से बहुत बुरा व्यवहार होता था। घर पर पुलिस रेड से आहत होकर श्यामा शर्मा के पिता की मृत्यु हो गई। कुछ समय बाद श्यामा नाहन पहुंची तो प्रदेश सरकार ने उन पर मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट लगा दिया। इसके तहत हिरासत में लिए जाने के बाद कई दिन तक पुलिस थाने के लॉकअप में रखा जाता था। उसके बाद उन्हें नाहन सेंट्रल जेल शिफ्ट कर दिया गया।
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