हिमाचल
शिमला : हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव का मामला लगातार सुर्खियों में है. आज इस मामले में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान प्रतिवादी की ओर से देवेन्द्र नेगी बनाम स्टेट मामले में न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा के फैसले हवाला दिया गया था. इस पर न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति जियालाल भारद्वाज की खंडपीठ ने इस मामले को न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की आदलत के सामने रखने के निर्देश दिए हैं. अब मामले में 6 जनवरी को न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने सुनवाई होगी.
6 जनवरी को न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की खंडपीठ करेगी सुनवाई
अधिवक्ता डिक्कन ठाकुर और अन्य की ओर से दायर याचिका पर हाई कोर्ट में चीफ़ जस्टिस न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति जियालाल भारद्वाज की खंडपीठ ने सुनवाई की. मामले में दोनों पक्षों की बहस सुनाने के बाद मुख्य न्यायाधीश की अदालत ने कहा कि देवेंद्र नेगी बनाम स्टेट मामले में डिवीजन बेंच एक (न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा) ने इलेक्शन रूल 9(2) को सेट असाइड करते हुए आगे चुनाव की प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के आदेश दिए थे. मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली डबल बेंच ने पाया कि इस केस की सुनवाई के दौरान किशन सिंह तोमर बनाम स्टेट ऑफ़ गुजरात मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ध्यान में नहीं लाया गया. मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने डिवीजन बेंच एक के देने पर टिप्पणी करने से इनकार किया और मामले को डिवीजन बेंच एक के सामने रखने के निर्देश दिए. अब मामले में 6 जनवरी को न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की खंडपीठ सुनवाई करेगी.
याचिकाकर्ता का आरोप पंचायत चुनाव में जानबूझकर की जा रही देरी
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर अधिवक्ता डिक्कन ठाकुर और अन्य की ओर से याचिका दायर की गई है. याचिका में आरोप है कि हिमाचल प्रदेश पंचायत चुनाव में जानबूझकर देरी की जा रही है. याचिकाकर्ता का आरोप है कि 31 जनवरी को पंचायत का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है. लेकिन अभी तक पंचायत चुनाव से संबंधित कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है. कानून है कि पंचायत का कार्यकाल पूरा होने से 6 महीने पहले चुनाव को लेकर तैयारी करना आवश्यक है. लेकिन अब तक चुनाव आयोग की ओर से आदर्श आचार संहिता का केवल एक सेक्शन लगाया गया है. मामले में हिमाचल प्रदेश सरकार और राज्य चुनाव आयोग को पार्टी बनाया गया है.







