
संवाददाता,शिमला: गुड़िया प्रकरण में नया मोड़ सामने आया है। गुड़िया की मां हाईकोर्ट में फिर याचिका दायर करेंगी। सर्वोच्च न्यायालय ने मामले का निपटारा करते हुए कहा कि प्रार्थी को संबंधित हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दायर करनी चाहिए। गुरुवार को गुड़िया की मां की याचिका की सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने पाया कि हिमाचल हाईकोर्ट ने मामले में स्वत: संज्ञान लिया था।
सीबीआई ने मामले की जांच की थी। अब इन परिस्थितियों में प्रार्थी को हाईकोर्ट में सभी शिकायतों के निवारण को याचिका दायर करनी चाहिए। यह जानकारी मदद सेवा ट्रस्ट के प्रेस सचिव विकास थापटा ने शुक्रवार को शिमला में पत्रकार वार्ता में दी। मदद सेवा ट्रस्ट इस मामले में गुड़िया के परिजनों को लीगल मदद कर रहा है।
विकास थापटा ने कहा कि अगले सप्ताह हाईकोर्ट में गुड़िया की मां याचिका दायर करेंगी। कहा कि गुड़िया के परिजन इस संबंध में हुई जांच से संतुष्ट नहीं हैं। पहले गैंगरेप से जांच शुरू की गई जो बाद में चिरानी को आरोपी बनाकर निपटा दी गई। गांधीनगर फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट और नार्को टेस्ट को भी दरकिनार किया गया। इस मामले में दोबारा जांच होनी चाहिए।
शिमला के दांदी जंगल में स्कूल में पढ़ने वाली गुड़िया मृत मिली थी। हाईकोर्ट ने मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए इसकी जांच सीबीआई को दी थी। मामले में लॉकअप में पूछताछ के दौरान एक नेपाली को मौत के घाट उतारा गया, जिसके आरोपी आईजी, एसपी समेत नौ पुलिसकर्मी बनाए गए। सीबीआई ने मामले में एक चिरानी नीलू को गिरफ्तार किया। उसे ही इस हत्या और दुराचार का आरोपी बनाकर मामले में कोर्ट में चालान पेश किया। अब कोर्ट में मामले की सुनवाई चल रही है। इसी बीच मदद सेवा ट्रस्ट की सहायता लेकर गुड़िया की मां सुप्रीम कोर्ट पहुंची तो वहां से यह फैसला आया है।


