संवाददाता,शिमला: एसएफआई विश्वविद्यालय इकाई ने मेरिट बेस्ड एडमिशन के खिलाफ आज डीएस का घेराव किया है। गौरतलब है कि एसएफआई विश्वविद्यालय के मेरिट बेस्ड एडमिशन के खिलाफ लगातार संघर्षरत है। विश्वविद्यालय में पढ़ने का सपना लिए हजारों छात्रों ने पीजी डिग्री कोर्सेज में प्रवेश परीक्षा के लिए अप्लाई किया था। हालांकि कोरोना काल के दौरान छात्रों को बहुत सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। फिर भी छात्रों ने जैसे तैसे उस वक्त प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन किया जिस वक्त प्रदेश में कोरोना तेजी से फैल रहा था।
लेकिन अब जब कोरोना का संक्रमण उस वक्त से कई कम है और अब विश्वविद्यालय के जब प्रवेश परीक्षा की तैयारियों की पोल खुलने वाली है तो प्रशासन कोरोना संक्रमण का बहाना बना रहा है। मेरिट बेस्ड एडमिशन से समाज के उस छात्र तबके को सीधे नुकसान होगा जो कम सुविधाओं के बावजूद भी मुख्य धारा में अन्य छात्रों के साथ प्रतियोगिता करने का ख्वाब लेकर लगभग 5 महीनों से कड़ी मेहनत कर रहा है। ताकि उच्च शिक्षा प्राप्त कर छात्र अपना भविष्य सवार सके।
लेकिन विश्वविद्यालय के मेरिट बेस्ड प्रवेश के फैसले से उनके सपनों पर पानी फेरने का काम करने जा रहा है।
धरने को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय उपाध्यक्ष साथी ने बताया कि मेरिट बेस्ड एडमिशन प्रोसेस में एक निजी संस्थान में पढ़ने वाला 30 में से 30 अंक प्राप्त करने वाला और सरकारी संस्थान में पढ़ने वाला 30 में से 20-25 असेसमेंट लेने वाले कैसे कंपीट कर पाएंगे।
इकाई अध्यक्ष रविन्द्र चंदेल ने कहा कि सुबह से छात्र उपकुलपति कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे थे लेकिन विश्वविद्यालय उपकुलपति अपने आरामदायक कार्यालय का ही लुत्फ लेते रहे। उन्होंने छात्रों से बात तक नही की। यह विश्वविद्यालय प्रशासन का गैर छात्र चरित्र को दर्शाता है। एसएफआई ने स्पष्ट किया है कि एसएफआई अंतिम समय तक विश्वविद्यालय प्रशासन के इस फैसले का विरोध करती रहेगी।

