शिमला, 12 सितंबर 2026। डूअर्स और सेंट बीड्स कॉलेज, शिमला द्वारा संयुक्त रूप से Hexagon Safety, Infrastructure & Geospatial के सहयोग से क्लाइमेट लिटरेसी एंड एक्शन प्रोग्राम (CLAP) के अंतर्गत जलवायु एवं आपदा क्षमता विषय पर छह दिवसीय अंतर-महाविद्यालयीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। 7 से 12 सितंबर 2026 तक आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न महाविद्यालयों के 60 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में जलवायु परिवर्तन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, आपदा तैयारी एवं आपदा क्षमता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें व्यावहारिक ज्ञान और आवश्यक कौशल प्रदान करना रहा।
छह दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR), आपदा प्रबंधन की मूल शब्दावली, DRR Clubs, जलवायु परिवर्तन एवं आपदा जोखिम, फील्ड आधारित सीख, कॉलेज परिसर में संभावित आपदा जोखिमों की पहचान तथा आपदाओं के दौरान युवाओं की भूमिका जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण को केवल सैद्धांतिक चर्चा तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों को संवादात्मक सत्रों, समूह चर्चा, फील्ड गतिविधियों और व्यावहारिक अभ्यासों के माध्यम से विषय को समझने का अवसर प्रदान किया गया।
जलवायु परिवर्तन एवं आपदा जोखिम विषय पर विशेष सत्र डॉ. वनीत जिस्टू, वरिष्ठ वैज्ञानिक, HFRI (सेवानिवृत्त) एवं तकनीकी विशेषज्ञ—जैव विविधता द्वारा लिया गया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों, पर्यावरणीय बदलावों तथा आपदा जोखिम को कम करने के लिए जागरूकता और स्थानीय स्तर पर तैयारी की आवश्यकता पर विद्यार्थियों के साथ चर्चा की। वहीं, आपदाओं में युवाओं की भूमिका विषय पर सत्र डॉ. खयाल चंद, एसोसिएट प्रोफेसर, आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ, डॉ. मनमोहन सिंह हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान (MSHIPA), शिमला द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें आपदा प्रबंधन और जोखिम न्यूनीकरण में युवाओं की सक्रिय भूमिका पर जानकारी साझा की गई।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को Arboretum का शैक्षणिक भ्रमण करवाने के साथ विभिन्न फील्ड गतिविधियों में शामिल किया गया। इसके अतिरिक्त Campus Hazard Hunt और Transect Walk के माध्यम से विद्यार्थियों ने कॉलेज परिसर और आसपास के क्षेत्र का अवलोकन करते हुए संभावित खतरों, संवेदनशीलता, एक्सपोज़र तथा उपलब्ध संसाधनों की पहचान की। इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपने आसपास मौजूद आपदा जोखिमों को स्वयं पहचानने और उनके संभावित प्रभावों को समझने के लिए व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना रहा।
कार्यक्रम में HP SDRF की टीम द्वारा प्राथमिक उपचार, CPR और आपातकालीन बचाव तकनीकों पर विशेष व्यावहारिक सत्र आयोजित किया गया। विद्यार्थियों को आपातकालीन परिस्थितियों में प्राथमिक प्रतिक्रिया देने, CPR की प्रक्रिया समझने तथा बचाव कार्यों से जुड़ी आवश्यक तकनीकों का अभ्यास करवाया गया। इस व्यावहारिक प्रशिक्षण से विद्यार्थियों की आपदा अथवा किसी आकस्मिक परिस्थिति में प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने की क्षमता को मजबूत करने का प्रयास किया गया।
छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को जलवायु परिवर्तन और आपदा जोखिम को स्थानीय स्तर पर समझने के साथ-साथ टीमवर्क, फील्ड ऑब्जर्वेशन, समस्या की पहचान, आपातकालीन तैयारी और सामुदायिक भागीदारी का अनुभव मिला। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि जलवायु एवं आपदा लचीलापन विकसित करने में युवाओं की जागरूकता और सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण है तथा विद्यार्थी अपने कॉलेज और समुदाय में जागरूकता फैलाने में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यक्रम का समापन 12 सितंबर 2026 को आयोजित समापन समारोह एवं प्रमाण-पत्र वितरण कार्यक्रम के साथ हुआ। समापन समारोह में श्री टिकेंद्र पंवार, पूर्व उप महापौर एवं शहरी विकास विशेषज्ञ, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रशिक्षण में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। छह दिवसीय कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को जलवायु परिवर्तन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण और आपातकालीन तैयारी से जुड़े विषयों पर ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया और उन्हें भविष्य में जलवायु एवं आपदा लचीलापन निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया।