गुरु या मंत्री जाएंगे राज्यसभा?
अरविंद कंवर
हिमाचल में राज्यसभा की एक सीट के लिए 26 मार्च को चुनाव हैं, चुनाव तो कहने की बात है, जाएगा तो भाजपा से ही लेकिन इस एक सीट के लिए कई दावेदार पैदा हो गए हैं. हालांकि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व तो प्रदेश से मुख्यमंत्री के कांटे ही दूर करना चाहता है और एक मंत्री को दिल्ली भेज कर जय राम ठाकुर की राह आसान करना चाहते हैं और मंत्री साहब भी अपनी पारिवारिक जमा भाग को देख कर उम्र के इस दौर में दिल्ली जाने में खुश हैं. इसके उनको भी 2-3 फायदे नजर आ रहे हैं. एक अपनी जगह बेटे को राजनीति में लॉन्च कर देंगे और सत्ता में होने के कारण बेटा विधायक बन जाएगा और अगले 3 साल में सेटल हो जाएगा. हालांकि मंत्री जी की इस योजना में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर रोड़ा बन सकते थे परन्तु बेटे ने पहले ही उस तरफ अपनी पींगे बढ़ानी शुरू कर दी थी. बेटे के सेटल होने के साथ साथ अपने भी 6 वर्ष सुरक्षित हो जाएंगे. मुख्यमंत्री भी असहजता से बाहर आ जाएंगे परंतु मुख्यमंत्री अपने गुरु को राज्यसभा भेजने में इच्छुक नजर आ रहे हैं जिनकी वजह से वो मुख्यमंत्री बने, अब उनको गुरु दक्षिणा देना चाहते हैं लेकिन भाजपा के नए अध्यक्ष चूंकि हिमाचल से हैं वो किसी सूरत में उनको राज्यसभा भेजना नहीं चाहते हैं. उनकी अपनी वजह है. एक तो मुख्यमंत्री की कुर्सी के इतने करीब से चूक गए तो वो गुरुजी का ही कमाल था, दूसरा सब अगर राज्यसभा ही चले जाएंगे तो फिर संगठन को कौन चलाएंगे यह सवाल भी है. इसके इलावा नाम तो दो तीन और भी चल रहे हैं पर देखने वाली बात अब यह होगी कि मुख्यमंत्री दिल्ली में क्या चर्चा करके आए हैं क्योंकि इस हफ्ते में ही यह फैसला होने वाला ही है. मंत्री जाते हैं तो एक और विधायक मंत्री बनने की दौड़ में शामिल हो जाते हैं और गुरु जाते हैं तो मुख्यमंत्री अपने गुरु को खुश कर जाएंगे.

