कोरोना संक्रमण की जांच को लेकर फिलहाल दो प्रकार के टेस्ट मौजूद हैं जिसमें पहला है रैपिड टेस्ट यह सबसे तेज है लेकिन यह ज्यादा सटीक नहीं है अगर इसके सही होने की दर की बात करें तो ये कम है और कुछ मामलों में व्यक्ति के कोरोनावायरस पॉजिटिव होने के बावजूद भी रिपोर्ट नेगेटिव हो जाती है। ऐसे में ऑप्शन है दूसरा टेस्ट जिसे RTPCR टेस्ट कहा जाता है जो अभी तक मौजूदा टेस्टों में कोरोना को पकड़ने का सबसे सटीक तरीका है। मगर इसमें मसला यह है कि इस टेस्ट की रिपोर्ट आने में 24 तो कभी-कभी 48 घंटे का वक्त लग जाता है मगर यह भी 100% सटीक नहीं है इसमें भी कई बार व्यक्ति पॉजिटिव होने के बाद भी नेगेटिव हो जाता।
डॉक्टरों की मानें तो इसके दो कारण हो सकते हैं पहला जब इस टेस्ट के लिए सैंपल लिया गया हो तो उस सैंपल सही ढंग से ना लिया गया हो। दूसरा और महत्वपूर्ण कारण यह है हो सकता है वायरस गले और नाक से उतरकर फेफड़ों में चला गया हो ऐसे केस में भी RTPCR टेस्ट में व्यक्ति नेगेटिव आ सकता है।
इसीलिए डॉक्टर उन व्यक्तियों को जो टेस्ट में तो नेगेटिव है मगर कोरोना के लक्षण दिखा रहे हैं उन्हें सिटी स्कैन की सलाह दी जा रही है। हालांकि यह कोरोना का टेस्ट नहीं है। मगर इससे फेफड़े की स्थिति पता चल जाती है और पता चल सकता है कि व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव है अथवा नहीं। दरअसल सिटी स्कैन के द्वारा फेफड़े की 3D तस्वीरें ली जाती है और इसमें वायरस के फैलाव के द्वारा यह तय किया जाता है कि व्यक्ति को कोरोनावायरस है अथवा नहीं। खैर जैसे-जैसे कोरोनावायरस के साथ हम लड़ते जा रहे हैं इसके बारे में नए तथ्य भी सामने आते ही रहते हैं। कोरोना को लेकर सबसे सटीक टेस्ट माने जाने वाले RTPCR भी किन्ही मामलों में करुणा ढूंढने में फेल हुए हैं ऐसे में सीटी स्कैन के द्वारा पता करने की कोशिश की जा रही है मगर स्वयं सीटी सकैन ना कराएं डॉक्टर की सलाह के बाद ही इस दिशा में आगे बढ़े।

