नई दिल्ली। कोरोना संक्रमित लोगों को अब रिकवरी के 3 महीने बाद टीका लगाया जाएगा, जबकि अब तक 6 महीने बाद वैक्सीन लगवाने की सिफारिश की गई थी। पिछले दिनों ऐसी खबर भी सामने आई थी जहां कहा गया था कि कोरोना से रिकवर होने के बाद टीकाकरण के लिए 9 महीने का समय अंतराल रखने की सलाह NEGVAC की ओर से दी जा सकती है, मगर बुधवार को इन सब से अलग टीकाकरण की अवधि को लेकर कुछ और ही बातें सामने आई।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड-19 टीकाककरण अभियान को लेकर बनाए गए नैशनल एक्सपर्ट ग्रुप वैक्सीनेशन (NEGVAC) की सिफारिश को मंजूरी दे दी है। अब नए नियमों के मुताबिक, अगर कोई कोरोना टीके की पहली खुराक लेने के बाद संक्रमित हो जाता है तो वह रिकवर होने के 3 महीने बाद दूसरी खुराक ले सकता है। ANI द्वारा साझा की गई ख़बर के मुताबिक COVID19 के लिए वैक्सीन प्रशासन पर राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह की नई सिफारिशों को स्वीकार कर लिया गया है और इस संदर्भ में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सूचित भी कर दिया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार नई सिफारिशों के अनुसार कोविड से रिकवर होने के 3 महीने बाद तक वैक्सीनेशन नहीं कराने की सलाह दी गई है।
#COVID19 के लिए वैक्सीन प्रशासन पर राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह की नई सिफारिशों को स्वीकार कर लिया गया है और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सूचित कर दिया गया है। नई सिफारिशों के अनुसार कोविड से रिकवर होने के 3 महीने बाद तक वैक्सीनेशन नहीं कराने की सलाह दी गई है : स्वास्थ्य मंत्रालय
— ANI_HindiNews (@AHindinews) May 19, 2021
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से देश भर में चल रहे कोविड-19 टीकाककरण अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए नैशनल एक्सपर्ट ग्रुप वैक्सीनेशन (NEGVAC) का गठन किया, जिसका मुख्य लक्ष्य टीकाकरण को लेकर दिशा-निर्देश तय करना है और टीकाकरण के बीच अंतराल अवधि घटाने बढाने को लेकर सिफारिश करने का काम भी इसी ग्रुप का दाईत्व है।
मगर पिछले एक महीने में ही कई बार टीकाकरण को लेकर बने नियमों में बदलाव किए गए हैं। जिससे टीकाकरण को लेकर आम जनता में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। जहां एक ओर ये बारम्बार होते टीकाकरण के नियमों में बदलाव वेक्सिनेशन के लिए बनाए गए एक्स्पर्ट ग्रुप की वेक्सिन को लेकर समझ पर ही सवाल खड़े करते हैं, तो वहीं एक पहलू ये भी है कि इस वायरस और इसके उपचार के लिए बनाई गई वेक्सिन पर अभी कहीं भी एकमत्ता नज़र नहीं आती। कोरोना वायरस और इसकी वेक्सिन को लेकर समझ शोध और अनुभवों के आधार पर ही बन सकती है मगर उसके लिए वक़्त देना ज़रूरी है, मगर बड़ते मामले और सामने आते कोरोना के नए-नए वेरिएंट मुश्किलों को और बढ़ा रहे हैं।







