मुख्यमंत्री के निर्देश अनुसार आज दिनांक 3/7/ 2022 को मुख्य सचिव महोदय की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई जिसमें भगवानों के हितों की ओर सेब की फसल के बारे में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए बागवानो के हितों में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सरकार ने तय किया कि प्रदेश में सभी भगवानों को जिन्होंने 1/4/ 2022 के बाद सेब की पेटियां एवं ट्रे खरीदी है उनका वस्तु एवं कर सेवा (जीएसटी) का 6% उत्पादन बागवानी विभाग एवं एचपीएमसी के माध्यम से उपलब्ध करवाया जाएगा
प्रदेश के बागवान अपने संबंधित उद्यान विभाग के कार्यालय में जाकर एक फॉर्म पर अपना प्रार्थना पत्र देंगे जिसके साथ जीएसटी बिल की कॉपी बिकी प्रकरण, परिवहन वस्तु खरीद रसीद, बाजार शुल्क की प्रति ,
उपलब्ध करवाएंगे ताकि उनके आधार युक्त बैंक खातों में इस 6% जीएसटी का लाभ सरकार द्वारा एचपीएमसी के माध्यम से सीधा जमा करवाया जा सके
इसके अतिरिक्त एचपीएमसी द्वारा बेचे के कार्टन एवं ट्रे पर भी यह उपदान उपलब्ध रहेगा।
सरकार द्वारा यह निर्णय भी लिया गया है कि इस सारे जीएसटी के खर्च को प्रदेश सरकार द्वारा वहन किया जाएगा
एचपीएमसी को निर्देश जारी किए गए हैं कि इस बार के सेब सीजन को ध्यान में रखते हुए वह कम से कम एक करोड़ बेटियों के पैकेजिंग सामग्री के आवंटन की तैयारी कर ले जिसमें से उनके द्वारा 50% तैयारी पूरी की जा चुकी है यह करवाना इसलिए आवश्यक है ताकि भगवान को किसी प्रकार की असुविधा का सामना ना करना पड़े
बैंक में सरकार द्वारा यह भी तय किया गया कि 86500000 रुपए की धनराशि जो प्रदेश सरकार ने अभी विभाग को दी है उसका भुगतान बागवानो को तुरंत किया जाए ताकि 2021 तक एमआईएस की अदायगी पूर्ण रूप से चुकता कर दी जाए
बैठक में यह भी कहा गया कि इस वर्ष की अदायगी करने हेतु सरकार द्वारा धन की उपलब्धता करवाई जाती रहेगी ताकि बागवानो को कोई संकट ना हो
सरकारी प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि बागवानो से संबंधित उपकरण एंटी हेलनेट तथा अन्य संबंधित उपकरणों की अदायगी हेतु विभाग जैसे ही इस वर्ष के बजट का वह कर लेगा उसे तुरंत अतिरिक्त बजट के प्रावधान करने की व्यवस्था कर दी जाएगी
एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय से अवगत कराते हुए सरकारी प्रवक्ता ने यह भी बताया कि बागवानी नीति में बदलाव करते हुए सरकार में गत वर्षों में गत वर्षो की भांति विभिन्न प्रकार के कीटनाशकों के उत्पादन की पुरानी योजना लागू कर दी है जिसके अनुसार सारी वस्तुएं उद्यान विभाग के केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध होगी।







