स्पेशल डेस्क: मणिपुर की मूल निवासी लिसीप्रिया कंगुजम की उम्र सिर्फ 9 साल है।उसे अभी करीब 10 साल लगेंगे कॉलेज पहुंचने के लिए लेकिन फिर भी वो NEET और JEE परीक्षाएं टालने के लिए मांग कर रही है। इस नन्ही सी एक्टिविस्ट का कहना है कि अगर इस साल वो इन परीक्षाओं के लिए प्रतिस्पर्धी होती, तो वह परीक्षा देने के लिए किसी सेंटर पर जाने से अपने घर पर ही रहना ज़्यादा ठीक समझती।
आपको बता दें जब से नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को तय समय पर मेडिकल और इंजीनियरिंग की परीक्षाएं आयोजित करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की सहमति मिली है, तबसे देश भर में सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक छात्र और अन्य लोग आवाज़ उठा रहे हैं। परीक्षाएं न आयोजित किए जाने के समर्थन में जो आवाज़ें उठ रही हैं, उनमें लिसीप्रिया भी शामिल है, जिसे ट्विटर पर 78 हज़ार से ज़्यादा लोग फॉलो करते हैं। इस नन्ही सी एक्टिविस्ट के बारे में जानने लायक बहुत कुछ है।
देश में कोविड 19 के फैलने के दौरान होने जा रहीं परीक्षाओं को टालने के लिए लिसीप्रिया ने दिन ब दिन अपने ट्वीट्स तेज़ कर दिए हैं। लिसीप्रिया के ट्वीट्स का असर ये है कि उनके कई साथी क्लाइमेट एक्टिविस्ट इस मुद्दे पर ट्वीट कर रहे हैं। यहां तक कि पिछले साल क्लाइमेट चेंज के ग्लोबल मंच से चर्चित हुईं ग्रेटा थनबर्ग ने भी NEET और JEE को टालने के लिए ट्वीट किया।
ग्रेटा के अलावा कई देशों में एक्टिविज़्म से जुड़े कई छात्र इस मुहिम से जुड़े हैं और न्यूयॉर्क के दो किशोर एक्टिविस्टों ने तो संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के आगे विरोध प्रदर्शन करते हुए भारत में परीक्षाओं के इस मुद्दे को उठाया।

कौन है लिसीप्रिया?
जून 2019 में लिसीप्रिया ने संसद भवन के सामने पीएम नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए भारत में क्लाइमेट चेंज संबंधी कानून बनाने के लिए प्रदर्शन किया था। इसके बाद लिसीप्रिया ने सोशल मीडिया पर क्लाइमेट चेंज के मुद्दे पर कई पोस्ट करने शुरू किए। देखते ही देखते वह काफी लोकप्रिय हो गई। लिसीप्रिया ने 2018 में मंगोलिया में यूएन कॉन्फ्रेंस अटेंड की थी, यहां से उन्हें क्लाइमेट एक्टिविज़्म की प्रेरणा मिली।लिसीप्रिया ने ‘चाइल्ड मूवमेंट’ नाम की एक संस्था शुरू की है, जो बाल एक्टिविस्ट तैयार करती है। 196 देशों में 26 हज़ार लोगों की मौजूदगी में संयुक्त राष्ट्र के कॉप25 सम्मेलन में क्लाइमेट चेंज पर लिसीप्रिया ने वक्तव्य दिया था।
क्यों और कैसे इस मुहिम से जुड़ी लिसीप्रिया?
लिसीप्रिया ट्विटर सहित सोशल मीडिया पर खासी मौजूदगी रखती हैं और दुनिया भर में उनके संपर्क हैं इसलिए छात्रों ने उनसे संपर्क कर अपनी बात उठाने को कहा था। एडेक्स की रिपोर्ट कहती है कि पहले लिसीप्रिया इस मामले में एक्टिव नहीं थीं, लेकिन कई छात्रों ने उनसे संपर्क कर उन्हें जोखिम भरी स्थिति से अवगत कराते हुए मदद के लिए अपील की थी।
इसके बाद लिसीप्रिया ने इस मुहिम के समर्थन में ट्वीट करने शुरू किए। लिसीप्रिया के मुताबिक एक तो ये छात्र ट्विटर पर पहले पहल सक्रिय हुए थे और दूसरी तरफ हमारे नेता लाखों छात्रों की आवाज़ नहीं सुन रहे थे इसलिए उन्होंने मदद करने का फैसला किया।







