संवाददाता, शिमला : हिमाचल प्रदेश मजदूर-किसान यूनियन ने आज शिमला के उपायुक्त कार्यालय के बाहर जोरदार धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान मजदूरों ने आरोप लगाया कि कोरोना संकट काल के दौरान जहां उनकी मदद की जानी थी, वहां उनका शोषण किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से मजदूरों को कोई भी सहायता प्रदान नहीं की गई है। अपनी तमाम मांगों को लेकर मजदूर यूनियन ने जोरदार नारेबाजी की।
वहीं मजदूर-किसान यूनियन ने श्रम कानून में बदलाव के विरोध में सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त किया। मजदूर-किसान यूनियन की मांग है कि आयकर के दायरे से बाहर आने वाले लोगों को ₹7500 प्रति माह के की सहायता और 10 किलो प्रति व्यक्ति राशन उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार को चहिए कि वह मजदूरों की मजदूरी के लिए मनरेगा के काम के दिन बढ़ाकर 200 दिन का काम और 600 रूपये दिहाड़ी की जाये।
मजदूर किसान यूनियन का कहना है कि कोरोना संकट काल के दौरान मजदूरों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है और यदि कोरोना ने किसी को सबसे बुरी तरह से प्रभावित किया है तो वह मजदूर वर्ग है लेकिन अब तक मजदूरों को कोई भी सहायता मदद नहीं मिली है जिससे वह परेशान हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि कोरोना संकट काल के दौरान सरकार उन्हें राहत देने का काम करें क्योंकि मजदूर ही राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
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