पूनम मेहता,शिमला: मानसून सत्र के तीसरे दिन सदन की कार्यवाही शुरू होते ही हंगामा हो गया। सीएम जयराम ठाकुर को जवाब के लिए बुलाने पर विपक्ष इस बात पर अड़ गया कि विपक्षी सदस्यों को चर्चा में बोलने का पूरा मौका नहीं दिया गया। इस बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष में नोकझोंक हुई। कांग्रेस विधायक नारे लगाते रहे। नारेबाजी के बीच ही मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अपना जवाब शुरू किया। नारेबाजी करते हुए विपक्ष के सदस्य वेल में आ गए और यहां भी सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।
कांग्रेस के विधायक वेल में नीचे फर्श पर बैठ गए। स्पीकर स्थगन प्रस्ताव पर जवाब देने के लिए सीएम को बुला रहे थे तो नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि मंगलवार को सदन की बैठक को मंत्री के लिए बढ़ा दिया गया, जबकि सदस्यों के लिए नहीं बढ़ाया जा रहा है। जिन्होंने प्रस्ताव लाया, उन्हें बोलने का मौका दें।
क्या बोले मुख्यमंत्री….
मुख्यमंत्री बोले कि विपक्ष का रवैया हैरान करने वाला है। सीएम ने कहा कि उन्हें मंगलवार को तीन बजे जवाब देना था, मगर जब विपक्ष ने कहा कि इसे आगे बढ़ाया जाए तो इसे बढ़ाया गया। कोरोना पर स्वास्थ्य मंत्री नहीं बोलेंगे तो कौन बोलेंगे। इस बीच सदन से विपक्ष के सदस्य बाहर चले गए।
सीएम बोले कि विपक्ष ने कल वाकआउट किया, यह बाहर बताया गया। भीतर तो दर्ज भी नहीं हैं। सीएम बोले- आप लोग यहां से बाहर गए तो आप लोग मूवर हैं। आपकी तो गैर हाजिरी लगी। इसलिए बोलने का अवसर नहीं मिला। विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सीएम जयराम ठाकुर ही विधानसभा अध्यक्ष को हर बात डिक्टेट करवा रहे हैं। नियम 67 में चर्चा होनी है कि नहीं, यह मुख्यमंत्री तय करते हैं।
क्या बोले स्पीकर….
स्पीकर विपिन सिंह परमार बोले कि मुकेश अग्निहोत्री उंगली कर उन्हें डिक्टेट करवाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा नहीं होगा। सदन में नारेबाजी चली तो इस पर स्पीकर विपिन सिंह परमार बोले की जोर से नारे न लगाएं। इससे कोरोना वायरस का संक्रमण फैल सकता है। वह पहले भी विधानसभा के सदस्यों से आग्रह कर चुके हैं। नारेबाजी के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को जवाब देने के लिए बुलाया तो इस पर भी नारे बंद नहीं किए गए। मुख्यमंत्री के जवाब के बाद विपक्ष के सदस्य नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चले गए।







