संवाददाता, शिमला: हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय पर एसएफ़आई इकाई का बड़ा आरोप कहा प्रोफेसर तथा सहायक प्रोफेसर की भर्तियो में रोस्टर सिस्टम को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है। जो 200 पॉइंट रोस्टर सिस्टम इस बार लागू किया जा रहा है, उसमे पूरी तरह से कई डिपार्टमेंट में सारी की सारी सीट्स आरक्षित रखी गयी है। वहीं कई विभागों में एक भी सीट्स आरक्षित नही रखी गयी है। फॉर्म्स के छँटनी के लिये भी कोई कमिटी के गठन नही किया गया है वहां पर सीधे तौर पर अध्यादेश की अवहेलना की जा रही है।
एसएफआई ने माँग की है कि फॉर्म्स की छँटनी विभागाध्यक्ष से की जाए। कई विभागों में तो विभागाध्यक्ष भी कहीं और महाविद्यालय के बनाये हुए हैं जबकि वहाँ पर सबसे वरिष्ठ प्रोफेसर को विभागाध्यक्ष बनाया जाना चाहिए था। एसएफ़आई ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय अध्यादेश के अनुसार जब भी आप किसी भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित करते हैं तो विश्वविद्यालय को उसको कम से कम चार समाचार पत्रों में प्रकाशित करना होता है जबकि इस कोरोना के दौर में वो सिर्फ एक ही पत्र में प्रकाशित हुआ है।
वहीं यह साफ तौर पर दर्शाता है कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों को दरकिनार किया जा रहा है औऱ अपने चहेतों को भर्ती करवाने की मंशा से भर्तियां की जा रही है। अगर एक दिन के अंदर विश्वविद्यालय अपना पक्ष नही रखता तो एसएफआई आने वाले समय मे इस के खिलाफ़ सड़कों पर उतरेगी। भर्ती के नाम पर हो रही धांधली को कतई भी बर्दाश्त नही किया जाएगा।
वहीं एसएफआई ने हाल ही में प्रदेश सरकार द्वारा जो नई शिक्षा नीति को लागू करने की बात की है उसका भी जोरदार विरोध किया है। एसएफआई ने आरोप लगते हुए कहा की नई शिक्षा नीति महज सार्वजनिक शिक्षा को खत्म करने की साजिश है। इससे शिक्षा का निजीकरण तथा केंद्रीयकरण ही होगा। आरटीआई को कमजोर किया जा रहा है। एसएफआई ने आरोप लगाया कि जिस जल्दबाजी से हिमाचल प्रदेश सरकार इसको लागू करने जा रही है। उसके भयंकर परिणाम आने वाले समय मे देखने को मिलेंगे।
हिमाचल प्रदेश पहले से रूसा जैसे वाहियात सिस्टम से कई छात्रों का भविष्य बर्बाद कर चुका है जिसकी वजह से आज भी कई छात्र परेशान है। एसएफआई ने चेतावनी देते हुए कहा कि इन सभी मुद्दों को लेकर एसएफआई आने वाले 14 सितंबर को विधानसभा के बाहर प्रदर्शन करेगी। ये जो गूँगी बहरी सरकार है उसको ये चेतावनी देगी की अगर ये छात्र विरोधी नीतियों को वापिस नही लिया गया तो आने वाले समय मे आंदोलन और ज्यादा उग्र होगा तथा पूरा छात्र समुदाय सड़कों पर उतर कर अपनी लड़ाई लड़ेगी।

