संवाददाता, शिमला: सुरक्षा की दृष्टि से अति संवेदनशील भारत-चीन अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब 40 किलोमीटर तक के इलाके में अगर कोई व्यक्ति सरकारी तंत्र को चीनी हरकत की सूचना देना चाहे तो वह ऐसा नहीं कर सकता। ऐसा इसलिए है क्योंकि चीन से सटी हिमाचल की करीब सवा दो सौ किलोमीटर लंबी सीमा के भारतीय हिस्से में 40 किलोमीटर के दायरे में संचार का नेटवर्क ही नहीं है।लोगों को फोन करने के लिए सीमांत क्षेत्रों से देश के अंदरूनी इलाकों में करीब 40 किलोमीटर तक आना पड़ता है, जिसके बाद उन्हें नेटवर्क या संचार के अन्य साधन मुहैया होते हैं। हिमाचल पुलिस ने इस अति संवेदनशील इलाके में संचार के लिहाज से ब्लैकआउट होने पर चिंता जताते हुए प्रदेश सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार से सूचना तंत्र मजबूत करने की सिफारिश की है।
हाल के दिनों में चीन से बढ़ते तनाव के बाद हिमाचल से लगती करीब सवा दो सौ किलोमीटर से ज्यादा लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा बेहद संवेदनशील हो गई है। चीनी एयरफोर्स के हेलीकॉप्टरों के दो बार भारतीय वायु सीमा में घुसने के बाद इस क्षेत्र में भारत सरकार ने सेना, आईटीबीपी जैसी सुरक्षा एजेंसियों की गश्त बढ़ा दी है, लेकिन सीमांत क्षेत्रों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली हिमाचल पुलिस इस इलाके में कमजोर संचार नेटवर्क से चिंतित हैं। पिछले महीने हिमाचल पुलिस ने एसपी स्तर के कुछ अधिकारियों को इन सीमांत क्षेत्रों में जाकर जनता से बात कर रिपोर्ट तैयार की थी।
इसी रिपोर्ट की सरकार के सामने प्रस्तुति देते समय डीजीपी संजय कुंडू ने चिंता जताई थी कि अगर किसी को सीमांत इलाके से भारतीय एजेंसियों को सूचना देनी हो तो वह फोन या अन्य संचार माध्यमों का इस्तेमाल नहीं कर सकते। कुंडू ने बताया कि इस कमी को सरकार से साझा किया गया है। साथ ही यह भी कहा गया कि जल्द इन इलाकों को भी संचार के माध्यमों से जोड़ा जाए, ताकि सुरक्षा एजेंसियों को और मदद मिल सके।

