मोक्ष शर्मा,शिमला: दो दिन के अवकाश के बाद आज विधानसभा सत्र एक बार फिर शुरू हुआ। आज विधानसभा की छठे दिन की कार्यवाही जारी थी। उसी दौरान हिमाचल प्रदेश एसएफआई कार्यकर्ताओं ने विधानसभा का घेराव किया। कार्यकर्ताओं नें सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार कोरोना संकटकाल के बीच फीस बढ़ोतरी कर रही है ऐसे में विद्यार्थियों पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। इसके अलावा एसएफआई ने मांग रखी की अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को छोड़कर अन्य सभी विद्यार्थियों को प्रमोट किया जाए। साथ एसएफआई कार्यकर्ताओं ने सरकार पर आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार हिमाचल प्रदेश को प्रयोगशाला बना रही है क्यूंकि इससे पहले सरकार ने RUSA सिस्टम लागू किया जो पूरी तरह विफल रहा।

इसके बाद अब बिना तैयारी के नई शिक्षा नीति को लागू किया जा रहा है। जिसके लिए प्रदेश सरकार अभी बिल्कुल भी तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को फीस बढ़ोतरी और साथ ही नई शिक्षा नीति को जल्द से जल्द वापिस लेना होगा। कार्यकर्ता अंबेडकर चौक से विधानसभा की ओर बढ़े जहां पुलिस अधीक्षक मोहित चावला की अगुवाई में पुलिस का भारी बल तैनात था और विधानसभा से ठीक 200 मीटर की दूरी पर कार्यकर्ताओं को रोक दिया गया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने विधानसभा के बेरिगेट के पास धरना प्रदर्शन जारी रखा।

क्या रही प्रमुख मांगे…
एसएफआई के सैंकड़ो छात्रों ने ताली औऱ थाली बजाकर सरकार के खिलाफ अपना विरोध जाहिर किया। SFI पिछले 6 महीनों से छात्रों के विभिन्न मुद्दों जिनमें फर्स्ट और सेकंड ईयर के छात्रों को प्रमोट करने की मांग, एससी-एसटी छात्रों की छात्रवृत्ति, विश्वविद्यालय में भर्तियों की गड़बड़ी की जांच सहित अन्य मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया।
क्या कहना है राज्य सचिव अमित ठाकुर का..
एसएफ़आइ के राज्य सचिव ने कहा कि प्रदेश सरकार कोरोना काल में छात्र विरोधी निर्णय ले रही है। फीसों में वृद्धि की गई है और निजी विश्व विद्यालय फर्जी डिग्री बांटने का काम कर रहे हैं। नई शिक्षा नीति जिसका छात्र, अध्यापक और कई अन्य संगठन विरोध कर रहे हैं। उसे सरकार प्रदेश में लागू करने जा रही है जिससे फर्जी डिग्री बांटने वाले विश्व विद्यालय को यही काम करने की कानूनी इजाजत मिल जाएगी, इसलिए एसएफआई नई शिक्षा नीति का विरोध कर रही रही है।
विश्व विद्यालय में बैक डोर भर्तियां हो रही हैं जो जांच का विषय है। सरकार छात्रों को मुद्दों को लेकर जल्दी कोई निर्णय ले, अन्यथा छात्र और उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।







