संवाददाता, शिमला : निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ गुरुवार को सैकड़ों अभिभावकों ने विधानसभा परिसर के बाहर प्रदर्शन किया। छात्र अभिभावक मंच के बैनर तले अभिभावकों ने मंत्रिमंडल की बैठक में हुए फैसले का अभी तक पालन नहीं होने को लेकर रोष जताया। शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर सरकारी आदेशों को सही तरीके से लागू नहीं करने का भी आरोप लगाया गया। इस दौरान एडीएम शिमला के माध्यम से मंच के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को 15 सूत्रीय मांग पत्र भी भेजा।
अभिभावकों ने निजी स्कूलों पर नियंत्रण करने के लिए सरकार से कानून बनाने की मांग उठाई। विक्ट्री टनल से विधानसभा परिसर तक अभिभावक रैली निकालकर पहुंचे। छात्र अभिभावक मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा व सदस्य विवेक कश्यप ने कहा है कि प्रदेश के केवल पांच हजार कारखानेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए विधानसभा में एक ही दिन में पांच अध्यादेशों पर मुहर लगा दी गई जबकि प्रदेश सरकार निजी स्कूलों को संचालित करने व इन से जुड़े 16 लाख छात्रों व अभिभावकों को प्रभावित करने वाले कानून को जानबूझ कर लटका रही है।
इस कानून का प्रस्ताव हिमाचल सरकार के पास एक वर्ष से पड़ा हुआ है। हिमाचल प्रदेश में कार्यरत लगभग तीन हजार निजी स्कूलों में मनमानी लूट हो रही है। इन तीन हजार निजी स्कूलों में करीब 10 लाख अभिभावकों के 6 लाख बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं जोकि प्रदेश के कुल छात्रों का लगभग 45 प्रतिशत है। निजी स्कूलों की खुली मनमानी व बेलगाम लूट पर प्रदेश सरकार खामोश है। अभिभावक पिछले दो वर्षों से प्रदेशभर में इन स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया, पाठ्यक्रम व फीसों को संचालित करने के लिए कानून बनाने की मांग कर रहे हैं।
इन स्कूलों के संदर्भ में सन 1997 में बना कानून व वर्ष 2003 के नियम सिर्फ सफेद हाथी हैं व वे किसी भी रूप में इन स्कूलों का किसी भी तरह नियमन नहीं करते हैं। ये स्कूल 25 प्रतिशत गरीब छात्रों को मुफ्त शिक्षा देने हेतु शिक्षा का अधिकार कानून 2009 को भी लागू नहीं करते हैं। ये स्कूल जानबूझ कर पीटीए का भी गठन नहीं करते हैं। निजी स्कूलों की मनमानी लूट पर रोक लगाने के लिए हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 2016 में दिए गए निर्णय का भी खुला उल्लंघन हो रहा है।
इन मांगों को पूरा करने को लेकर सौंपा ज्ञापन
– निजी स्कूलों की मनमानी लूट व भारी फीसों पर रोक लगाई जाए।
– निजी स्कूलों को संचालित करने के लिए तुरंत कानून बनाया जाए।
– निजी स्कूलों को संचालित करने के लिए रेगुलेटरी कमीशन बनाया जाए।
– निजी स्कूलों में टयूशन फीस के अलावा अन्य चार्जेज पर रोक लगाई जाए।
– निजी स्कूलों को फीस बुकलेट जारी करना अनिवार्य किया जाए।
– निजी स्कूलों में पीटीए गठन अनिवार्य किया जाए।
– ऑनलाइन क्लासेज के मोबाइल डाटा खर्च की फीस से कटौती की जाए।
– गरीब छात्रों को ऑनलाइन क्लासेज से बाहर करना बंद किया जाए।
– निजी स्कूलों में शिक्षा का अधिकार कानून 2009 लागू किया जाए।
– वर्ष 2014 की मानव संसाधन विकास मंत्रालय की गाइडलाइन लागू की जाए।
– जिन स्कूलों ने ऑनलाइन क्लासेज नहीं लगाई हैं वहां पूरी फीस माफ की जाए।
– फीस की आड़ में अभिभावकों व बच्चों को डराना धमकाना बंद किया जाए।
– एचडी स्कूल जनेड़घाट और आईवीवाई स्कूल भट्ठाकुफ्फर की मनमानी पर रोक लगाई जाए।


