पूनम मेहता/शिमला: आज हिमाचल प्रदेश की 13वीं विधानसभा के मानसून सत्र का सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस मानसून सत्र के दौरान कुल 10 बैठकें आयोजित की गई। सदन की बैठक खत्म होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि सदन की कार्यवाही 47 घंटे चली। उन्होंने कहा कि जब इस सत्र की तैयारियां की जा रही थी तब किसी को भी अंदाजा नहीं था कि विश्वव्यापी कोरोना महामारी के चलते यह सत्र पूर्ण हो पाएगा या नहीं।
लेकिन अधिकारी व कर्मचारियों के अथक प्रयासों के साथ यह विधानसभा सत्र सफलतापूर्वक पूरा हुआ। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के विधानसभा सर्वप्रथम देश की सबसे पहली विधानसभा है और कोरोना काल में 10 दिवसीय सत्र का आयोजन करने वाली भी विधानसभा बनी है। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल नियमों के तहत चर्चाएं हुई और बिल पेश किए गए। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के 53 वर्षों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआअति महत्वपूर्ण और सामरिक विषय पर नियम के तहत प्रस्ताव को मंजूर किया गया।
उन्होंने कहा कि सत्र को कराने के लिए पूरी तैयारियां की गई थी और 6 फीट ऊंची पॉलीकार्बोनेट शीट के जरिए सदस्यों को सोशल डिस्टेंस पृथक किया गया था। अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने जानकारी देते हुए बताया कि सत्र में जनहित के महत्वपूर्ण विषयों पर प्रश्न के माध्यम से चर्चा हुई और सदस्यों के सुझाव प्राप्त हुए। इस सत्र के दौरान कुल 434 तारांकित और 223 तारांकित प्रश्नों की सूचनाओं पर सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए।
साथ ही उन्होंने कहा कि नियम 67 के अंतर्गत स्थगन प्रस्ताव जो कोरोना महामारी से संबंधित प्रस्ताव पर चर्चा के लिए लाया गया था, उस पर पक्ष व विपक्ष के 28 सदस्यों ने 6 घंटे 25 मिनट तक चर्चा की। साथ ही उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि नियम 61 के अंतर्गत 5 विषयों के अंतर्गत, 130 के अंतर्गत पांच प्रस्तावों पर चर्चा हुई। इसमें सदस्यों ने की इसके अलावा नियम 101 तथा पिछले सत्र में प्रस्तुत पर चर्चा की।
विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने सत्र के सफलतापूर्वक पूर्ण होने पर प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री, पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, संसदीय कार्यमंत्री सुरेश भारद्वाज और सत्र के काम में लगे अधिकारियों-कर्मचारियों के सहित मीडिया कर्मियों का धन्यवाद किया।







