चंडीगढ़। शहर में किसानों की बल्ले बल्ले होगी। किसान अपनी जमीन पर कंपनियों और बिल्डरों के साथ मिलकर प्रोजेक्ट तैयार कर सकेंगे। प्रशासन शहर की पहली लैंड पूलिंग पॉलिसी लाने की तैयारी कर रहा है। यह पॉलिसी शहर के 23 गांवों की 3 हजार एकड़ जमीन की डेवलपमेंट के लिए लाई जा रही है।
प्रशासन ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया हैं।
चंडीगढ़ की इस पॉलिसी के लिए पंजाब व हरियाणा की पॉलिसी की स्टडी की जा रही है।
इसके लिए प्रत्येक गांव में किसानों की कमेटियां गठित की जाएंगी, जो प्रशासन को अपने सुझाव और आपत्तियां सौंपेंगी।किसानों से प्राप्त सुझावों के आधार पर लैंड पूलिंग पालिसी का ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा। इसके बाद मसौदे को मंजूरी के लिए गृह मंत्रालय भेजा जाएगा। मंत्रालय की स्वीकृति मिलने के बाद नीति को लागू करने की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी ।प्रस्तावित लैंड पूलिंग पालिसी के तहत किसानों की जमीन को विकास परियोजनाओं के लिए एकत्रित किया जाएगा ।भाजपा के सीनियर नेताओं ने नीति को लेकर प्रशासक से बात भी की है ।जिस पर प्रशासक की ओर से आश्वासन दिया गया है । जिसके बाद भाजपा ने रविवार को इंटरनेट मीडिया पर बनाए अपने अकाउंट पर जानकारी दी है कि प्रशासन जल्द ही इस पर नीति लेकर आ रहा है । भूमि के विकास के बाद किसानों को उनकी हिस्सेदारी के अनुसार विकसित प्लाट उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रशासन का दावा है कि इससे किसानों को उनकी जमीन का बेहतर मूल्य मिलेगा और शहर के नियोजित विकास को भी गति मिलेगी।इस समय शहर में तीन हजार एकड़ जमीन है जिसके मालिक लैंड पूलिंग नीति की मांग कर रहे हैं । लैंड पूलिंग पालिसी को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच लंबे समय से चर्चा चल रही है। अब गांव स्तर पर सुझाव लेने की पहल को नीति निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। रियल एस्टेट सेक्टर के एक्सपर्ट एवं RealtyPromoo.com के चीफ मनोज सिंह नेगी के अनुसार यह पॉलिसी चंडीगढ़ के प्रॉपर्टी बाजार में बूम लेकर आएगी। कई नए प्रोजेक्ट यहां शुरू होंगे। इससे जहां शहर मे निवेश बढ़ेगा वहीं युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।
संसद में भी उठ चुका लैंड पूलिंग नीति का मामला
चंडीगढ़ में लैंड पूलिंग नीति का मामला संसद में भी उठ चुका है ।पंजाब सरकार ने फारेस्ट एक्ट के तहत परिधि (पेरिफरी) में स्थित फार्महाउसों के लिए चेंज आफ लैंड यूज़ को नोटिफाई कर दिया है। जबकि चंडीगढ़ में न तो लैंड पूलिंग पालिसी है और न ही सीएलयू नीति है जिस कारण लोग अपनी जमीन भी नहीं बेच पा रहे हैं ।ऐसे में जमीन पर अवैध निर्माण भी बढ़ रहा है ।धनास की कच्ची कालोनी इसकी का उदाहरण है जिस पर अब प्रशासन बुलडोजर चलाने का निर्णय ले रहा है ।अगर समय रहते इस जमीन को अधिग्रहण कर लिया गया होता तो यहां पर निर्माण न होता । इसके साथ ही शहर का विकास भी रूका हुआ है ।नगर निगम का सदन भी लैंड पूलिंग नीति को पास करके प्रशासन को मंजूरी के लिए भेज चुका है।पिछले साल शहर के सांसद मनीष तिवारी की ओर से लोकसभा में पालिसी को लेकर सवाल पूछे थे ।अपनी मांगो को लेकर पेंड विकास मंच के बैनर तले 23 गांव के प्रतिनिधि मुलापुर में धरना भी लगा चुके हैं ।
शहर में हैं 23 गांव
शहर में 23 गांव है जो कि इस समय नगर निगम के अंतगर्त है अब यहां से पंचायतें भी समाप्त हो चुकी है । जिनमें कजहेड़ी, पलसोरा और रायपुर कलां जैसे इलाके शामिल हैं, पंजाब न्यू कैपिटल (पेरिफेरी) कंट्रोल एक्ट, 1952 और चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 के दायरे में आते हैं। इन नियमों के तहत कृषि भूमि को आवासीय, व्यावसायिक या औद्योगिक उपयोग में बदलने पर कड़े प्रतिबंध हैं ।
जमीन की कीमतें आसमान पर
चंडीगढ़ में जमीन की कीमतें आसमान को छू रही है। किसान अपनी जमीन पर खेती के अलावा कुछ कमर्शियल काम नही कर सकते। पॉलिसी बाने से न केवल उन्हें उचित दाम मिलेगा बल्कि कई नए प्रोजेक्ट शहर में लागू होंगे।