संवाददाता, शिमला: SFI हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी का एक प्रतिनिधिमंडल राज्य सचिव अमित ठाकुर के नेतृत्व में उच्च शिक्षा निदेशक से वर्तमान में छात्रो की समस्या को लेकर मिला तथा शिक्षा निदेशक को माँगपत्र भी सौंपा गया।
SFI का मानना है कि प्रदेश सरकार व विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रो के भविष्य को लेकर चिंतित नही है। इसलिए प्रदेश में अभी स्नातक प्रथम व द्वतीय वर्ष के छात्रो की परीक्षा या प्रमोशन पर अभी तक कोई फैसला नही हुआ है। 4 महीने का समय बीत गया है छात्र किस मानसिक तनाव से गुजर रहे है सरकार को कोई चिंता नही है। जबकि दूसरे विश्वविद्यालय या राज्यो में छात्रो को प्रमोट कर दिया गया है और नए सत्र की कक्षाएं भी शुरू हो गई है लेकिन प्रदेश विश्वविद्यालय की नाकामी के चलते अभी तक ये छात्र असमंजस में है।
इस के चलते SFI ने मांग की है कि प्रदेश में सभी शिक्षण संस्थानो में अध्ययनरत प्रथम व द्वितीय वर्ष के छात्रो को शीघ्र पिछले परीक्षा परिणाम के आधार पर अगली कक्षा में प्रमोट किया जाए। क्योंकि इस महामारी के कारण छात्र एक तो मानसिक रूप से परीक्षाओ के लिए तैयार नही है, दूसरा ऐसे समय मे परीक्षाओ का होना संक्रमण को न्यौता देने के अलावा और कुछ नही है।
SFI राज्य सचिव अमित ठाकुर ने कहा है कि हाल ही में आयोजित स्नातक व स्नाकोत्तर की परीक्षाओ में भी कई संक्रमण के मामले सामने आए है जिसमे प्रशासन की लापरवाही भी साफ तौर पर देखने को लिली है। ऐसे में इन घटनाक्रम से सबक लेते हुए सभी छात्रो को प्रमोट किया जाना जरूरी है।
दूसरा महत्वपूर्ण मुद्दा NIT हमीरपुर से जुड़ा है जहाँ NIT प्रशासन द्वारा केंद्र सरकार के आदेशों पर सभी छात्रो की छात्रवृत्ति पर कोविड19 की आड़ में रोक लगा दी गई है। यह फैसला सरकार के उच्च शिक्षा के प्रति नकारात्मक रवैये को दर्शाता है। इसलिए केंद्रीय वित मंत्रालय द्वारा छात्रवृति के रूप में जारी की जाने वाली ग्रान्ट इन ऐड को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया है। SFI हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी ने आज उच्च शिक्षा निदेशक से शीघ्र इस छात्र विरोधी फैसले को वापिस लेने के लिए माँग की है।

