कृषि कानून में एमएसपी की व्यवस्था पहले की तरह रहेगी जारी
संवाददाता, शिमला: जनता पार्टी प्रदेश सचिव विरेंद्र चौधरी ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी के पास अब कोई मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वह देश के भोले-भाले किसानों को गुमराह कर रही है। जबकि सच्चाई यह है कि हाल में ही केंद्र सरकार द्वारा पास किए विधेयक किसानों के हित में है। कांग्रेस ने एपीएमसी एक्ट को हटाने की बात की थी लेकिन इन विधायकों के अनुसार एपीएमसी की व्यवस्था बनी रहेगी और उसी तरह काम करती रहेगी। कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में कृषि सुधार की बात कही है लेकिन वर्तमान में वह कृषि सुधारों का विरोध कर रही है।
देश के कृषि मंत्री तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार बार कह चुके हैं कि देश में एमएसपी की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी इतना ही नहीं कई फसलों की एमएसपी तो बढ़ा दी गई है। वास्तव में इन विधायकों का एमएसपी और एपीएमसी व्यवस्था से कोई लेना देना नहीं है। कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य विधायक ,कृषिक सशक्तिकरण वह संरक्षक कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक और आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक के पास होने से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए नए नए अवसर मिलेंगे।
जिससे की किसानों का मुनाफा बढ़ेगा। इससे कृषि क्षेत्र को जहां आधुनिक टेक्नोलॉजी का लाभ मिलेगा। वहीं अन्नदाता सशक्त होंगे न्यूनतम समर्थन मूल्य और सरकारी खरीद की व्यवस्था बनी रहेगी। यह विधेयक किसानों को अपनी फसल के भंडारण और बिक्री की आजादी देंगे तथा वन नेशन वन मार्केट के नियम पर काम किया जाएगा।
वीरेंद्र चौधरी ने कहा कि मोदी सरकार किसानों के लिए प्रतिबद्ध है जो बजट यूपीए सरकार में 2010 में 12000 करोड़ था। अब उसको भाजपा सरकार ने 134000 करोड़ पर किया है। किसान सम्मान निधि योजना में अब तक 92 हजार करोड़ किसानों के खातों में सीधे ट्रांसफर किए जा चुके हैं। आत्मनिर्भर पैकेज के तहत कृषि के लिए एक लाख करोड़ की घोषणा की गई है!
किसानों के लोन के लिए पहले 800000 करोड़ के बदले अब 15 लाख करोड़ की व्यवस्था मोदी सरकार ने की है। मोदी सरकार ने स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट लागू कर उत्पादन लागत पर एमएसपी को बढ़ाकर डेढ़ गुणा किया है। प्रधानमंत्री किसान मानधन के तहत किसानों को 60 वर्ष की आयु होने पर न्यूनतम 3000 रुपए माह पेंशन प्रावधान किया गया है।
वीरेंद्र चौधरी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी भ्रामक प्रदर्शन तथा विरोध कर रही है जिसको कि लोगों ने सिरे से नकार दिया है। वहीं यह करते हुए वह ना तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं और ना ही किसानों की हित की कोई बात कर रहे हैं। वह केवल नेताओं के जिंदाबाद के नारे लगाने में व्यस्त हैं जबकि उनको किसानों से कुछ भी लेना देना नहीं है।


