कोरोना-2 का असर लगातार बड़ता जा रहा है और इसका असर अब लगभग क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। पहले राज्य में शैक्षणिक संस्थानों को बंद कर दिया गया और अब कोरोना महामारी के चलते भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ASI ने प्रदेश के प्राचीन ऐतिहासिक मंदिर और किलों में लोगों के लिए 15 मई तक बंद कर दिए हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के दिल्ली स्थित कार्यालय से आदेश जारी हुए हैं। हिमाचल में स्थित पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अंदर आने वाले ऐतिहासिक स्थलों पर पर्यटकों का जाना प्रतिबन्धित किया जाए। जारी आदेश में जिन ऐतिहासिक स्थलों को बन्द करने के आदेश आए हैं उनमें लाहौल का प्राचीन मृकला देवी मंदिर, बैजनाथ शिव मंदिर, सिद्धनाथ मंदिर, कुल्लू जिले में दशाल स्थित गौरीशंकर मंदिर, गौरीशंकर मंदिर नग्गर, विशेश्वर महादेव मंदिर बजौरा, गौरीशंकर मंदिर जगतसुख, मनाली का देवी हिडिंबा का मंदिर, मंडी जिले में पंचवक्त्र मंदिर, अर्द्धनारीश्वर, बरसेला और त्रिलोकीनाथ मंदिर शामिल है।
इसके अलावा कांगड़ा और नूरपुर का किला, सुजानपुर का ऐतिहासिक टिहरा का महल और नर्वदेश्वर मंदिर भी बंद रहेगा। मंदिरों में हर रोज की तरह समयानुसार आरती होगी। मंडी में पुरातत्व विभाग के संरक्षक लक्ष्मी ढोबी ने इसकी जानकारी दी। उधर, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान और पंजाब राज्य से आने वाले पर्यटकों के लिए सरकार की ओर से कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट लाने की सलाह देने के बाद प्रदेश में पर्यटक नदारद हो गए हैं।
भले ही इन सात राज्यों से आने वाले लोगों की कोविड रिपोर्ट प्रदेश की सीमाओं पर तैनात पुलिस कर्मियों से लेकर होटलों के कर्मचारी चेक नहीं कर रहे, लेकिन इस आदेश के चलते होटलों में एडवांस बुकिंग कम और रद्द होने के साथ-साथ आक्यूपेंसी भी आधे से कम हो गई है। होटल मालिकों ने कहा कि कोरोना रिपोर्ट चेक करने के लिए हमारे पास विशेषज्ञ नहीं हैं, इसलिए सरकार इसकी व्यवस्था करे।
आपको बता दें इस से पूर्व शैक्षणिक संस्थानों को भी बंद किया जा चुका है और हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय के तहत स्नातक स्तर की परीक्षाएं शनिवार से स्थगित कर दी गई हैं।
इसके अलावा सूबे के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने प्रदेश में नाइट कर्फ्यू और वीकेंड लॉकडाउन लगाने के भी संकेत दिए हैं। अब देखना ये होगा कि प्रदेश सरकार इस दिशा में आगे क्या फ़ैसला लेती है।

