दिल्ली।कोरोना के उपचार को लेकर पिछले दिनों को वैक्सीन और कोवीशील्ड से ज्यादा सुर्खियों में रेमेडीस्वियर दवा रही। और कोरोना वायरस के उपचार में यह दवा कारगर भी साबित हुई। अब स्वास्थ्य मंत्रालय केंद्र सरकार ने आज व्यस्क लोगों के उपचार को लेकर गाइडलाइन जारी किए और इसमें विशेष तौर पर रेमेडीस्वियर के इस्तेमाल को लेकर भी कई दिशा निर्देश दिए गए।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने वयस्क कोराना मरीजों के उपचार के लिए संशोधित क्नीनिकल दिशा निर्देश जारी किए हैं। एम्स-आईसीएमआर कोविड-19 राष्ट्रीय कार्य बल और मंत्रालय के अंतर्गत संयुक्त निगरानी समूह DGHC ने कहा है कि संक्रमण के लक्षण मिलने के 10 दिन के भीतर आपात स्थिति में रेमडेसिवियर को केवल उन मरीजों को दिया जा सकता है जिन्हें मध्यम से गंभीर लक्षण हों और जिन्हें ऑक्सीजन की आवश्यकता हो।
इसके अलावा गुर्दे या लीवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को रेमडेसिवियर नहीं दी जा सकती। जो मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर नहीं है या जो घर में हैं उन्हें रेमडेसिवियर लेने की जरूरत नहीं है। दिशानिर्देशों में कहा गया है कि टोसिलिजुम्ब दवा के ऑफ लेबल इस्तेमाल की मंजूरी मुख्यतः संक्रमण आने के 24 या 48 घंटे के भीतर या आईसीयू में भर्ती होने पर गंभीर स्थिति के लिए दी गई है।यह दवा उन मरीजों को भी दी जा सकती है जिनकी हालत स्टियोराएड लेने के बावजूद नहीं सुधार रही है तथा जिनमें कोई बैकटिरियल या फंगल संक्रमण न हो। कोविड संक्रमण से मुक्त हो चुके लोगों के प्लाज्मा से अन्य कोविड मरीजों का इलाज मुख्यत: लक्षण आने के सात दिन के भीतर और केवल उपयुक्त प्लाज्मा डोनर मिलने की स्थिति में किया जा सकता है।
कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने विकराल रूप ले लिया है और सरकारी आंकड़ों के हिसाब से पिछले कल देश में 1 दिन में सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए। आंकड़ों में आए इस भारी उछाल से कई दूसरे संकट भी उभरकर सामने आए हैं इसमें सबसे बड़ा संकट रहा ऑक्सीजन की कमी का जो खासतौर पर दिल्ली एनसीआर के क्षेत्र में में देखने को मिली। कोरोना वायरस जैसे-जैसे फैलता जा रहा है इसके बारे में नए तथ्य भी सामने आ रहे हैं और गौरतलब है कि इनको ध्यान में रखते हुए ही स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के द्वारा इस तरह के दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।


