रविवार को 4 प राज्यों पश्चिम बंगाल, असम, तमिल नाडु तथा केरल और पांडिचेरी केंद्र शासित प्रदेश के चुनाव परिणाम घोषित किए गए। आइए बताते हैं इन परिणामों के हिसाब से कहां पर बनी किस की सरकार
बात करें पश्चिम बंगाल की तो हालिया प्रादेशिक चुनावों में इस राज्य पर सभी की नजरें थी जहां पर बीजेपी और टीएमसी सीधे मुकाबले में आमने-सामने थी। इन चुनावों को लेकर भाजपा के सभी बड़े नेता पश्चिम बंगाल चुनाव यात्रा पर थे उसके बावजूद तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी ने जीत की हैट्रिक लगाई और 210 सीटें जीती। वहीं अबकी बार 200 पार वाली भाजपा 80 सीटें भी प्राप्त नहीं कर पाई। हालांकि ममता बनर्जी खुद नंदीग्राम सीट से शुभेंदु अधिकारी के सामने चुनाव हार गई और हार को लेकर ममता का कहना है कि वह जल्द ही चुनाव के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी। उनका मानना है कि ये चुनाव असंवैधानिक तरीके से जीता गया है। अब देखना यह है कि पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री का चेहरा आख़िर कौन होता है।
वहीं आसाम में भाजपा ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की और 50 सीटें हासिल की वही आसाम में प्रतिद्वंदी कांग्रेस को 29 सीटों से संतोष करना पड़ा। यह पहला मौका है जब आसाम में दूसरी बार कोई गैर कांग्रेसी पार्टी सत्ता में आई है और इस जीत में पिछली सरकार मुख्यमंत्री सर्वानंद सोमवार और मंत्री हेमंत बिसवा सरमा की अहम भूमिका रही है अब देखना यह है कि इस काल में आसाम का मुख्यमंत्री फेस कौन है।
वहीं तमिलनाडु के चुनावों में डीएमके ने बहुमत का जरूरी आंकड़ा पार कर लिया है आपको बता दें कि तमिलनाडु में डीएमके का कांग्रेस के साथ गठबंधन था वही एआईडीएमके का गठजोड़ भाजपा के साथ था। और संभवत तमिलनाडु में जल्द ही DMK पार्टी प्रमुख एमके स्टालिन मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। तमिलनाडु में DMK को 133 और कांग्रेस को 18 इसके अलावा AIDMK को 66 और उसकी सहयोगी भाजपा को केवल 4 सीटों से संतोष करना पड़ा।
इसके अलावा केरल राज्य के चुनाव में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया मार्क्सवादी के नेतृत्व में एलडीएफ ने भारी मतों से दोबारा विजय प्राप्त कर ली है और जल्द ही केरला में एलडीएफ की सरकार बनने जा रही है। केरल चुनाव में CPI(M) को 62 CPI को 17 और कांग्रेस ने 21 सीटों पर जीत दर्ज की भाजपा का खाता भी नहीं खुल पाया।
हालांकि पांडिचेरी के चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार बनने जा रही है। यहां भाजपा और सहयोगी दलों को 16 सीटें हासिल हुई वहीं कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को 8 सीटों से संतोष करना पड़ा।


