शिमला। कोरोना संक्रमण के तेज़ी से बड़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग पर भी भार बड़ा दिया है डॉक्टरज़ और नर्सिज़ लगातार लोगों की जान बचाने में लगे हुए हैं। ये सब देखते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए प्रदेश में MBBS के चौथे और पांचवें वर्ष के प्रशिक्षुकों और सीनियर व जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को कोविड समर्पित मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में कोविड ड्यूटी पर तैनात करने की घोषणा की थी और इसमें डॉक्टरों को 3000 नर्सिंग स्टाफ को 1500 मानदेय देना भी प्रदेश सरकार ने तय किया था। मगर इतने कम मानदेय को लेकर सरकार का विरोध भी देखने को मिला और सर्वदलीय बैठक के बाद विपक्ष के सदस्यों ने भी सरकार के इस फैसले पर कई सवाल उठाए।
मगर अब मामले को संज्ञान में लेते हुए प्रदेश सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए कोविड ड्यूटी पर तैनात किए जाने वाले सीनियर जूनियर रेजिडेंट चिकित्सकों और अनुबंध आधार पर तैनात किए जाने वाले चिकित्सकों के अलावा एमबीबीएस के चौथे और पांचवें वर्ष के प्रशिक्षुक छात्रों को का मानदेय 3000 से बढ़ाकर 10,000 प्रति माह करने का ऐलान किया है इसके अलावा नर्सिंग स्टाफ का मानदेय 1500 से बढ़ाकर 6000 रुपए प्रति माह और अनुबन्ध पर कोविड ड्यूटी देने वाले लेब कर्मियों का का मानदेय भी बढ़ाकर 5000 करने का निर्णय प्रदेश सरकार की ओर से लिया गया है। आपको बता दें कि ये मानदेय कोविड ड्यूटी पर तैनात होने वाले अभी पढ़ाई कर रहे मेडिकल स्टाफ को दिया जाना है और जो भत्ते या नियमित भुक्तान मेडिकल छात्रों को किया जाता है वो जस का तस उन्हें मिलता रहेगा। ये भी प्रदेश सरकार ने साफ किया है।

