कोरोना जिस तेज़ी से पिछले कुछ दिनों में बढ़ा है उसकी वजह से दवाइयों और मेडिकल ऑक्सीजन की डिमांड भी बढ़ी है और लोग ऑक्सीजन और दवाइयों के लिए जूझते नज़र आए। बात कोरोना से जुड़ी दवाइयों की करें तो इन दिनों रेमडिसविर का नाम बड़ी चर्चाओं में है। और ये न केवल इसलिए कि रेमडिसविर कोरोना से लड़ने में कारगर साबित हुई है। अपितु इसके अलावा यह दवा इसकी लगातार आ रही कालाबाजारी की खबरों के कारण भी सुर्खियों में है। ताज़ा समाचार पंजाब के रोपड़ से है जहां रेमेडिसिविर के 671 इंजेक्शन नहर में पड़े मिले हैं। और ऐसी आशंका है कि इंजेक्शनस की इस खेप का कनेक्शन हिमाचल प्रदेश में कुछ समय पहले पकड़ी गई डुप्लीकेट रेमडेसिविर बनाने वाली कंपनी से हो सकता है।
ख़बर के मुताबिक जहां यह इंजेक्शन मिले हैं, उसका नेशनल हाईवे और नहर के जरिए हिमाचल प्रदेश में उस कंपनी की लोकेशन से सीधा जुड़ाव माना जा रहा है जहां से कुछ वक़्त पहले बिना परमिशन रेमडीस्विर बनाने का मामला सामने आया था। कुछ वक़्त पहले मध्य प्रदेश के इंदौर में पकड़ा गया डॉ. विनय त्रिपाठी हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के सूरजपुर में ट्यूलिप फॉर्मूलेशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी चला रहा था। यहां बिना परमिशन के रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाए जा रहे थे। ऐसे में इस बात की आशंका है कि कंपनी सील होने के बाद कहीं दूसरी जगह रखी खेप को भी छापेमारी के डर से ठिकाने लगाने की कोशिश तो नहीं की गई। इसके अलावा मिली दवाई की शीशियों पर भी कई गड़बड़ियां देखने को मिली है जो इस कोरोना काल में और अधिक डरा देने वाला है।
अब सवाल उठते हैं कि रेमडेसिविर जैसी दवा जो इस दौर में कोरोना मरीजों के लिए बेहद अहम है और जीवन दायनी हो सकती है उसके इंजेक्शन यूं लावारिस मिलना और नकली रेमडेसिविर दवा का मिल जाना बेहद चिंता जनक है। और चुनौती है प्रशासन के लिए कि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।


