चंडीगढ़। कोरोना महामारी के कारण सब बन्द पड़ा है और ऐसे समय में आम जनता को अब महंगाई की मार भी झेलनी पड़ रही है। चंडीगढ़ में भी सब्जियों के दामों में भारी वृद्धि हुई है। जो टमाटर रविवार को थोक में 4 रुपये किलो बिक रहा था, मंडी कमेटी ने उसके दाम फुटकर में 25 रुपये तय कर दिए। रेहड़ी-फड़ी तक पहुंचकर यह टमाटर 35 रुपये किलो तक बिकने लगा है।
इसी तरह जो हरी मिर्च थोक में 10 रुपये किलो के भाव से बिक रही थी, उसका फुटकर दाम 30 रुपये तय कर दिया और यह लोगों तक 35 से 40 रुपये किलो तक पहुंच रही है। वहीं, थोक में 30 रुपये किलो वाले नींबू का रेट भी मंडी कमेटी ने 70 रुपये किलो तय कर दिया। 35 रुपये किलो के थोक भाव में बिकने वाले अदरक के दाम भी कमेटी ने फुटकर में 60 रुपये तय कर दिए। आढ़तियों का कहना है कि कमेटी के कर्मचारी बंद कमरे में बैठकर दाम तय करते हैं। बताया गया है कि कमेटी के कर्मचारी कभी भी मंडी में नहीं दिखते।
एक ओर कमरे में बैठ कर बेतहाशा दाम तय किए जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर, कर्फ्यू के कारण सब्जियों की मांग घट गई है। हाल यह है कि आढ़तियों को पत्तागोभी, शिमला मिर्च और ब्रोकली के खरीदार ही नहीं मिल रहे, जिस कारण इन्हें फेंकना पड़ रहा है। कर्फ्यू के कारण होटल व फास्ट फूड की दुकानें बंद हैं। सिर्फ होम डिलीवरी हो रही है। इससे सब्जियों की मांग लगभग न के बराबर है। ऐसे में आढ़तियों को घाटे में जाकर इन सब्जियों को बेचना पड़ रहा है।
आढ़तियों ने बताया कि रविवार को पत्तागोभी थोक में 3 रुपये किलो बिकी। पिछले साल इस समय पत्तागोभी 15 रुपये किलो बिक रही थी। वहीं थोक में 5 से 7 रुपये किलो बिक रही शिमला मिर्च के भी खरीदार नहीं मिल रहे हैं। शाम के समय बोरों में बंद शिमला मिर्च खराब हो जाती है। इस कारण इसे फेंकना पड़ता है। यही हाल ब्रोकली का है। ब्रोकली थोक में 20 रुपये किलो बिक रही है, लेकिन सामान्य तौर पर घर में यह बनती नहीं है। होटल व फास्ट फूड की दुकानें बंद होने से इसकी बिक्री भी ठप है। पिछले साल इस समय ब्रोकली 250 रुपये किलो बेची जा रही थी।
मंडी कमेटी बेशक प्रतिदिन सब्जी व फलों की सूची जारी करती हो, लेकिन रेहड़ी-फड़ी वाले मनमाने तरीके से ही अपनी सब्जी बेचते हैं। रविवार को नारियल थोक में 40 रुपये में बिका था। कमेटी ने रिटेल में नारियल के दाम 55 रुपये तय किए थे। इसके बावजूद कुछ लोगों ने 70 रुपये में नारियल बेचा। इसी तरह रेहड़ी-फड़ी वाले सब्जियों के दाम लोगों से ज्यादा वसूल रहे हैं। इसकी लगातार निगम व कमेटी के पास शिकायत भी होती रहीं हैं।







