पंजाब। प्रदेश कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान अब भी जारी है। पिछले दिनों विवाद को बढ़ता देख कांग्रेस आलाकमान ने मामले को शांत करने के लिए एक समिति का गठन किया। इसी के मद्देनजर पंजाब कांग्रेस के नेताओं का कांग्रेस हाईकमान की तरफ से गठित समिति से लगतार दूसरे दिन भी मुलाकातों दौर जारी है। इनमें पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ सबसे ज्यादा मुखर नवजोत सिंह सिद्धू रहे हैं और इस मामले को लेकर वे भी समिति सदस्यों से मुलाकात के लिए दिल्ली पहुंचे। न्यूज़ एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक मुलाकात के बाद सिद्धू ने कहा कि वे जमीनी स्तर के लोगों की आवाज उठाने आए हैं। लोकतांत्रिक सत्ता पर उनका स्टैंड स्पष्ट है। लोगों की शक्ति लोगों के पास ही रहनी चाहिए। उन्होंने हमेशा सच कहा है। ANI ने ट्विटर के माध्यम से ये जानकारी साझा की।
जो कुछ भी हाईकमान ने पार्टी के हित में पूछा उन्हें पूरी तरह से सजग कर दिया है। पंजाब के लोगों की आवाज हाईकमान तक पहुंचाने आया हूं और मेरा पक्ष है कि पंजाब के लोगों की वित्तीय ताकत जो टैक्स के रूप में सरकार को जाती है वो लोगों तक वापस जानी चाहिए: नवजोत सिंह सिद्धू, कांग्रेस pic.twitter.com/zWyiUe5L4Y
— ANI_HindiNews (@AHindinews) June 1, 2021
सिद्धू के कड़े रुख को देखते हुए अनुमान लगाया जा सकता है कि, विवाद किस हद तक गहरा है। इन सब के बीच नाराज खेमे से भी कुछ मंत्री और विधायक समिति सदस्यों से मुलाक़ात के लिए पहुंचे, और समिति में शामिल राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे, वरिष्ठ नेता जयप्रकाश अग्रवाल और राज्य के प्रभारी महासचिव हरीश रावत से बातचीत की। हालांकि बातचीत के लिए पहुंचे नेताओं में कैप्टन अमरिंदर सिंह के समर्थकों की संख्या ज्यादा थी।
इससे पूर्व सोमवार को प्रदेश के 25 मंत्री और विधायकों ने नेताओं ने समिति के सामने अपनी-अपनी बात खुलकर रखी। पंजाब कांग्रेस के अंदर नाराज खेमे के नेताओं ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाए। तो वहीं, कैप्टन समर्थक मंत्रियों और विधायकों ने 2022 के चुनाव की तैयारियों संबंधी खाका पेश किया।
बहरहाल पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही ये सियासी उठापटक क्या मोड़ अख्तियार करती है, ये फिहलाल आने वाले वक्त पर निर्भर है। मगर पार्टी के भीतर ही कांग्रेसी नेताओं के विद्रोही सवर पंजाब में कांग्रेस की स्थिति पर असर तो ज़रूर डालेंगे।







