न्यूज़ डेस्क। कोरोना की दूसरी लहर से परेशान जनता को अब बेलगाम महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है। नौकरी गंवाने और कारोबार बंद होने के कारण आर्थिक संकट का सामना कर रहे लाखों परिवारों के सामने रसोई का बजट संभालना मुश्किल हो रहा है। बीते एक साल में जरूरी खाद्य सम्रागी की कीमतों में 40 से लेकर 100 फीसदी का उछाल आया है। सबसे ज्यादा तेजी सरसो के तेल में दर्ज की गई है। देश में कई राज्यों में सरसो का तेल 200 रुपये प्रति किलो के पार निकल गया है।
बीते साल और इस साल के लॉकडाउन को देंखे तो सबसे ज्यादा कीमतों में तेजी इसी दौरान देखने को मिली है। इससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है। यूं तो हर क्षेत्र में महंगाई का असर देखने को मिला है मगर सबसे ज्यादा महंगाई खाद्य तेल की कीमतों में देखने को आई है। पिछले साल के मुकाबले खुले बाजार में दाम लगभग डबल हो गए। उपभोक्ता मंत्रालय के मूल्य निगरानी प्रभाग के आंकड़ों के मुताबिक एक अप्रैल से 20 मई के बीच सरकारों की तेल की कीमतों में तीस रुपए प्रति किलो की वृद्धि हुई है। पोर्ट ब्लेयर में यह वृद्धि 45 रुपए है।
विशेषज्ञों का कहना है कि देश में महंगाई अगले कुछ महीनों तक यूं ही सताने वाली है। विशेषज्ञों की राय में महंगाई इस साल के मध्य तक घटनी शुरू होगी और सब ठीक रहा तो साल के आखिर तक ही जाकर घट पाएगी क्योंकि दूसरी लहर से मांग और आपूर्ति बड़े स्तर पर प्रभावित हुई है। कई विशेषज्ञों ने आशंका भी जाहिर की है कि अगर लॉकडाउन और कर्फ्यू को ठीक तरह से मैनेज नहीं किया गया तो खाने-पीने की चीजों की भी महंगाई और बढ़ सकती है।
बहरहाल कोरोना महामारी ने देश की आर्थिक कमर तोड़ कर रख दी है। उद्योग धंधे बन्द पड़े हैं और बेरोजगारी अपने चरम पर है। ऐसे में महंगाई की चक्की में पिस रही आम जनता परेशान है। इस को लेकर सरकारों की क्या योजना है ये कहीं नज़र नहीं आता।







