न्यूज़ डेस्क। हाल ही में हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के तीन दिग्गज नेता सुधीर शर्मा, आशा कुमारी और मुकेश अग्निहोत्री की ऊना में एक बैठक हुई थी। जिसके बाद प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की रणनीति को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। यह मुद्दा अभी गर्म ही था और शुक्रवार को फिर से शिमला में कांग्रेस पार्टी के 5 बड़े नेताओं की एक अहम बैठक भी हो गई। इन 5 नेताओं में 3 तो सुधीर शर्मा, आशा कुमारी और मुकेश अग्निहोत्री ही थे और इनके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पुत्र और शिमला ग्रामीण से विधायक विक्रमादित्य सिंह और पूर्व मंत्री ठाकुर कौल सिंह भी मौजूद थे। ऊना के बाद शिमला में हुई इस बैठक के कई मायने निकाले जा रहे हैं, कुछ लोग इसे 2022 के चुनावों की तैयारी से जोड़कर देख रहे हैं और कुछ लोग कांग्रेस पार्टी की आंतरिक राजनीति से जोड़कर इसे देख रहे हैं।

पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने ऊना में हुई बैठक की यह तस्वीर फेसबुक पर शेयर करते हुए लिखा था “एक मुलाकात, नई शुरुआत”।
ऊना में हुई बैठक की तस्वीर फेसबुक पर शेयर करते हुए पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने लिखा था “एक मुलाकात, नई शुरुआत”। और उनके इस वक्तव्य के भी अलग मायने निकाले जा रहे हैं।
कुछ दिनों पहले कांग्रेस पार्टी में पूर्व मंत्री जीएस बाली और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के पोस्टर को फाड़ने को लेकर पोस्टर विवाद छिड़ा हुआ था, क्योंकि उस पोस्टर में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की तस्वीर नहीं थी। और इसी पोस्टर विवाद के बाद वीरभद्र सिंह का खेमा कांग्रेस पार्टी में काफी सक्रिय होता नज़र आ रहा है।

शुक्रवार की बैठक के बाद सुधीर शर्मा ने फेसबुक पर फोटो डालते हुए लिखा है “अब हवाएं ही करेंगी रोशनी का फैसला”.
शुक्रवार को शिमला में हुई पांच नेताओं की बैठक के मायने इस तरह से भी निकाले जा रहे हैं कि इस बैठक में ठाकुर कौल सिंह भी मौजूद थे जो कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खेमे के नहीं माने जाते हैं, और इसके बाद वीरभद्र सिंह के विरोधी धड़े में चिंताएं भी बढ़ सकती है। कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर भी इस बैठक में नहीं दिखे, और इस बात को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं हो रही है। ऐसे में यह देखना काफी दिलचस्प होगा की 2022 के विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस पार्टी किस तरह की रणनीति बनाती है और कितने आंतरिक गुटों को एकजुट करने में सफल हो पाती है। हालांकि इन सभी अध्यायों में पूर्व मंत्री जीएस बाली और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू का नाम कहीं सुनने में नहीं आ रहा।
इस बैठक का कांग्रेस पार्टी की रणनीति पर क्या असर होगा यह तो आने वाले समय में ही पता चल पाएगा लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि कांग्रेस पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष को बदलने की चर्चा भी पार्टी में पनप रही है और साथ ही वीरभद्र खेमा बाली और सुक्खू के खेमों से ज्यादा सुर्खियां बटोरता नजर आ रहा है और ठाकुर कौल सिंह का इस बैठक में मौजूद होना कांग्रेस पार्टी की राजनीति एक नया मोड़ ला सकता है।







