शिमला। 11 जून को हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक हुई और इसमें कोरोना कर्फ्यू के दौरान लगी बंदिशों में ढील देते हुए अब 14 जून से 50 फीसदी यात्रियों के साथ बस संचालन को अनुमति दे दी गई है। सोमवार से प्रदेश भर में बस संचालन शुरू हो जाएगा, लेकिन निजी बस सेवाओं को लेकर अभी असमंजस की स्थिति बरकरार है। आज निजी बस ऑपरेटर की बैठक हुई जो बेनतीजा ही रही। अब यह बैठक रविवार को होनी है और रविवार को होने वाली इस बैठक में प्रदेश भर में निजी बस संचालन को लेकर फैसला लिया जाएगा।
इस बारे में जानकारी देते हुए निजी बस ऑपरेटर यूनियन के महासचिव रमेश कमल ने बताया कि आज वर्चुअल माध्यम से सभी निजी बस ऑपरेटर की बैठक हुई. हालांकि इस बैठक में कुछ आखरी नतीजा नहीं निकल सका. अब बैठक रविवार को होना तय हुई है.
उल्लेखनीय है, 11 जून को हुई हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में हुए निर्णय के मुताबिक प्रदेश के निजी बसों और टैक्सी संचालकों को राहत देते हुए, प्रदेश सरकार ने 1 अगस्त 2020 से 31 मार्च 2021 तक स्पेशल रोड टैक्स और टोकन टैक्स में 50 फीसदी की रियायत दी है। और सरकार द्वारा जारी आंकड़ों की माने तो इस रियायत से प्रदेश भर के टैक्सी संचालकों को 20 करोड़ और निजी बस संचालकों को ₹40 लाख रुपए का फायदा का फायदा मिलेगा।
हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से इस राहत को टैक्सी संचालकों ने नाकाफी बताया है. टैक्सी संचालकों का कहना है कि सरकार की ओर से 9 महीने के लिए दी गई स्पेशल रोड टैक्स और टोकन टैक्स में 50 फीसदी की रियायत से उन्हें कोई खास फायदा नहीं मिलेगा।
मगर हिमाचल प्रदेश सरकार की कैबिनेट की ओर से निजी बस संचालकों को स्पेशल रोड टैक्स और टोकन टैक्स में जो राहत दी गई है, उसको लेकर भी निजी बस संचालकों में दो मत सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार प्रदेश के अंदर जहां कुछ निजी बस संचालकों ने प्रदेश सरकार के फैसले को स्वीकार किया है और बस चलाने के हक में हैं, तो वहीं कुछ प्रदेश सरकार की इस राहत से अभी भी असंतुष्ट हैं।
कुछ ऐसा ही हाल टैक्सी संचालकों का भी है। टैक्सी संचालकों ने कहा कि कोरोना की वजह से देशभर में महंगाई बढ़ी है और हिमाचल प्रदेश में भी खाद्य पदार्थों के अलावा रोजमर्रा की जरूरत के सामानों के दाम में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है। टैक्सी संचालकों का काम भी नहीं चल रहा है, ऐसे में उनके लिए घर-परिवार का गुजर-बसर करना भी मुश्किल हो गया है।
प्रदेश भर में टैक्सी कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि संकट के इस दौर में बच्चों की फीस भरने से लेकर रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीदना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में प्रदेश सरकार को कोरोना की वजह से प्रभावित वर्ग को राहत देने के बारे में सोचना चाहिए।
कोरोना महामारी के कारण घर से बाजार तक सब पर असर हुआ है ऐसे में प्रदेश के निजी बस संचालकों और टैक्सी संचालकों पर भी इस बुरे वक्त ने अपना असर छोड़ा है। ऐसे समय में प्रदेश सरकार की ओर से टैक्सी संचालकों और निजी बस संचालकों को हालांकि कुछ राहत दी गई है, लेकिन जमीनी स्तर पर और निजी बस संचालकों और टैक्सी संचालकों की जेब पर इसका कितना असर होगा ये अभी तो तय नहीं किया जा सकता। चिंता का विषय भी है कि सरकार के द्वारा दी गई यह रियायत क्या निजी बस संचालकों और टैक्सी संचालकों को इस कोरोना संकट के समय से उबारने में मदद कर पाएगी। मगर सोचने वाली बात यह भी है कि क्या प्रदेश सरकार के पास इससे अधिक रियायत देने के लिए पर्याप्त संसाधन है यह भी या नहीं।

