शिमला। कोरोना महमारी के कारण हर क्षेत्र प्रभावित है। शिक्षा, पेशों, व्यवसायों आदि से जुड़े लोगों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। ऐसे में इस महामारी ने जितना नुकसान आर्थिकी और जनमानस का किया है। उससे कहीं अधिक निराशा और मानसिक तनाव भी इस महामारी के कारण समाज में फैला है। ऐसे समय में छात्र कैसे ख़ुद को मानसिक रूप से हर परेशानी या विपदा के लिए तैयार रख सकें, इसी कड़ी में सोमवार को उत्कृष्ट शिक्षा केंद्र राजकीय महाविद्यालय संजौली में, ‘कोविड महामारी में मनोवैज्ञानिक संबल का महत्व’ विषय पर एक ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया गया।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण शिक्षा समिति, उच्चतर शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की सहभागिता से आयोजित इस कार्यशाला में, प्राचार्य डॉ चंद्र भान मेहता बतौर मुख्य अतिथि उपसथित रहे, जबकि समर्थ शर्मा विषय विशेषज्ञ के रूप में शामिल हुए।
गूगल मीट के माध्यम से हुई कार्यशाला के सफल आयोजन पर, डॉ चंद्र भान मेहता ने कहा कि चुनौतियां जिंदगी का हिस्सा हैं, लेकिन जो बड़ी से बड़ी चुनौती में भी मानवीय मूल्यों एवम् परस्पर सहयोग की भावना को खत्म न होने दे, वही सच्चे अर्थों में शिक्षित है। उन्होंने कहा कि पूरी मानवता साथ मिलकर इस संकट पर भी विजय अवश्य हासिल करेगी।
कार्यशाला में विशेषज्ञ ने सभी प्रतिभागियों, विशेषकर विद्यार्थियों को कोविड संकट से त्रस्त व्यक्ति तक वैज्ञानिक परामर्श, मनोवैज्ञानिक सहयोग एवम् प्रशानिक सुविधाओं की त्वरित व प्रभावी जानकारी प्रदान करने के गुरमंत्र साझा किए।
कार्यशाला का संचालन डॉ राजेश धोरटा ने किया, तो वहीं प्रो मृत्युंजय शर्मा ने तकनीकी सहयोग दिया। इस कार्यशाला में महाविद्यालय के सभी प्राध्यापकों के अलावा लगभग एक सौ विद्यार्थियों ने भाग लेकर स्वयं को लाभान्वित किया।

