टौणीदेवी: पहाड़ों में बसा प्रदेश हिमाचल अपने अंदर एक लंबा और स्वर्णिम इतिहास संजोए हुए है। देवभूमि के नाम से मशहूर हिमाचल जितना अपनी खूबसूरती के लिए विख्यात है उससे कहीं ज्यादा अपनी वीरता के लिए भी प्रसिद्ध है और हर एक युद्ध में हिमाचल के जवानों का योगदान इसे स्पष्ट भी कर देता है और इसमें हिमाचल के सबसे छोटे जिले हमीरपुर का योगदान कहीं अधिक है।
हमीरपुर अपने अस्तित्व के 49 वर्ष पूरे कर चुका है। इस मौके पर हमीरपुर से संबंध रखने वाले और प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रहे प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल बताते हैं। पुराणों और पाणिनी की “अष्टाध्यई” के अनुसार महाभारत के काल में हमीरपुर जालंधर-त्रिगर्त साम्राज्य का एक हिस्सा हुआ करता था। जिसके बारे में लिखते हुए संस्कृत व्याकरण के सूत्रधार पाणिनी, यहां के लोगों को महान योद्धाओं और सेनानियों के रूप में संदर्भित करते हैं। उसी परम्परा को आज भी ज़ारी रखे हुए हमीरपुर से आज भी बड़ी संख्या में लोग भारतीय सेनाओं में देश की रक्षा का कर्तव्य निभा रहे हैं। उत्तरी भारत के क्षेत्रों में देश पर हुए कई भीषण हमलों में वीरभूमि हमीरपुर के रणबांकुरों ने कई बार अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान देते हुए रण यज्ञ में अपने प्राणों की आहुति दी है।
वीर भूमि के साथ राजनीति का केंद्र भी रहा हमीरपुर
वर्ष 1999 में मई और जुलाई के मध्य लगभग 60 दिन तक चलने वाले कारगिल युद्ध में वीरभूमि ज़िला हमीरपुर के 7 वीर सपूतों ने वीरगति को धारण कर मां भारती की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। वीरों की धरती हमीरपुर का इतिहास कटोच वंश से जुड़ा हुआ है। कांगड़ा ज़िला से अलग होकर हमीरपुर 1 सितम्बर 1972 को ज़िला के रूप में अस्तित्व में आया था। 50वें वर्ष में प्रवेश कर रहा ज़िला हमीरपुर वीरभूमि होने के साथ-साथ दशकों पहले से राजनीति के केंद्र के रूप में भी उभरा। वर्ष 1998 और 2007 में प्रदेश की जनता ने दो बार प्रदेश के नेतृत्व का ज़िम्मा भी प्रदेश के सबसे छोटे ज़िले हमीरपुर को देकर जिले के सम्मान को बढ़ाया। हमीरपुर जिले से संबंध रखने वाले प्रेम कुमार धूमल दो बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बन और हमीरपुर जिला के प्यार और आशीर्वाद से प्रेरणा लेकर अनुराग ठाकुर ने हमीरपुर के सम्मान को नए आयाम दिए। हमीरपुर संसदीय क्षेत्र की प्रबुद्ध जनता ने लगातार चार बार चुनाव जीता कर उन्हें लोकसभा भेजा, और वे वर्तमान में भारत सरकार में सूचना व प्रसारण एवं युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री के रूप में हमीरपुर जिला का नाम रोशन कर रहे हैं।
जिले की प्रबुद्ध जनता ने, हमीरपुर को बनाया सबसे ज्यादा साक्षर जिला: प्रो. धूमल
प्रदेश का सबसे ज्यादा साक्षर जिला हमीरपुर राजनीतिक गतिविधियों के अलावा शैक्षणिक गतिविधियों का भी केंद्र है, क्योंकि यहां पर बड़े-बड़े शैक्षणिक संस्थान मौजूद हैं, जैसे एनआईटी, तकनीकी विश्वविद्यालय, कैरियर पॉइंट यूनिवर्सिटी, मेडिकल कॉलेज, होटल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट, हॉर्टिकल्चर कॉलेज, बीएड कॉलेज, सैनिक स्कूल सहित अन्य कई बढ़िया स्कूल इत्यादि, जहां पर न केवल प्रदेश बल्कि अन्य राज्यों के बच्चे भी शिक्षा हासिल कर रहे हैं। सड़क शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के क्षेत्र में हमीरपुर जिला अगले पायदान पर है, जिसका श्रेय ज़िला की तमाम प्रबुद्ध जनता को जाता है, जिन्होंने इन क्षेत्रों में अपना बहुमूल्य योगदान दिया है।
वीरभूमि हमीरपुर का यश हमेशा बढ़ता रहे: प्रो. धूमल
हमीरपुर ज़िले की 49वीं सालगिरह के मौके पर ज़िला वासियों को बधाई देते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल ने हमीरपुर जिला की उन्नति और प्रगति की कामना करते कहा कि महान योद्धाओं और सेनानियों की धरती वीरभूमि हमीरपुर का यश हमेशा बढ़ता रहे। अस्तित्व में आने के बाद हमीरपुर जिला ने अब तक उन्नति और विकास के कई मौके देखे हैं और भविष्य में अभी कई और आयाम हमीरपुर जिला छुएगा। हमीरपुर जिला के लोग खुशहाल हों, उनका जीवन समृद्धशाली हो और कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन एवं स्वरोजगार के क्षेत्र में हमीरपुर के लोग और तरक्की करें ऐसी कामना करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने जिला के तमाम उन लोगों का भी धन्यवाद व्यक्त किया है जिन्होंने हमीरपुर को वर्तमान स्वरूप तक पहुंचाने में अपना योगदान दिया है। हमीरपुर जिले के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें विश्वास है वीरभूमि हमीरपुर की जनता कड़ी मेहनत और दृढ़ निश्चय के साथ सुनहरे कल और आत्मनिर्भरता को लक्ष्य बनाकर चलेगी तथा हमीरपुर के मान सम्मान को और आगे बढ़ाएगी।

