वैंटीलेटर खरीद में कोई अनियमितता नही : धीमान
विभाग के ध्यान में आया है कि स्वास्थ्य विभाग में वैटिलेटर खरीद के सम्बन्ध में एक शिकायत के आघार पर मीडिया में एक खबर छपी है । शिकायत में वैंटीलेटर खरीद के दौरान कथित अनियगितताओं के बारे में उल्लेख किया गया है । इस बारे में निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं से सम्पूर्ण दस्तावेजों सहित रिपोर्ट तलब की गई निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं ने स्पष्ट किया है कि इन वैंटिलेटरों की खरीद उस समय की गई है जब पूरा देश और प्रदेश कोरोना के संकट से जूझ रहा था और पूरे देश में स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार और विभिन्न राज्यों के स्वास्थ्य विभागों का ध्यान स्वास्थ्य सेवाओं की साक्षमताओं को बढ़ाने पर केन्द्रित था । चूंकि वैंटिलेटर की मदद से कोविड-19 से गंभीर रूप से ग्रसित मरीजों को बचाया जा सकता है. स्वास्थ्य विभाग सभी स्वास्थ्य संस्थानों को सशक्त करने के लिये वैंटिलेटर को कय करना चाहता था । इसी कड़ी में 28 मार्च, 2020 को उप निदेशक, स्वास्थ्य सेव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया जिसमें कय किये जाने वाले वैंटिलेटरों के तकनीकी मानकों के निर्धारित किया और अपनी संस्तुतियों के आधार पर आई०सी0 यू0 वैंटिलेटर खरीदने की सिफारिश की । निदेशालय स्वास्थ्य सेवाएं के स्तर पर संयुक्त निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं की अध्यक्षता में गठित की गई कय समिति ने संस्तुत वैंटिलेटर को कय करने की प्रकरिया आरम्भ की और भारत सरकार द्वारा निर्मित GeMP ortal पर उपलब्ध वैंटिलेरो के Rate व मानकों का अध्ययन किया । समिति ने यह पाया कि रांरतुत वैंटिलेटर का मूल्य GeM Portal में 29.3.2020 को 9.9 लाख रूपये दर्शाया गया है । इसी बीच समिति ने अन्य राज्यों में वैंटिलेटर को कय हेतु अपनाई जा रही प्रकरिया के बारे में भी अध्ययन किया और पाया कि उड़ीसा मैडिकल सप्लाईज कॉर्पोरेशन, जो कि उड़ीसा सरकार का उपकम है, ने यह संस्तुत वैंटिलेटर 20 मार्च, 2020 को कय किये थे । उड़ीसा मैडिकल सप्लाईज कार्पोरेशन ने 20 वैंटिलेटर कुल 1.83 करोड़ रूपये के कय किये थे जिसमें जीएसटी शामिल नहीं था । विभागीय कार्यसमिति ने समय को ध्यान में रखते हुये और स्वास्थ्य संस्थानों को कोविड-19 के उपचार हेतु सशक्त बनाने के उद्देश्य से सभी पहलुओं जैसे मूल्य, तकनीकी मानक इत्यादि को ध्यान में रखते हुये 10 वैंटिलेटर को कय करने के आदेश जारी किये और जिनमें से 7 वैंटिलेटर 15 अप्रैल 2020 को विभाग को प्राप्त हुए. जिन्हें तुरन्त प्रभाव से स्वास्थ्य संस्थानों को भेज दिया गया। स्वास्थ्य निदेशक ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि तत्पश्चात् हरियाणा मैडिकल सप्लाईज कार्पोरेशन ने उक्त वैंटिलेर का कय 16 अप्रैल, 2020 को किया है और प्रति वैंटिलेटर के कय पर खर्च की गई राशि 10.29 लाख रूपये है जो कि हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य निदेशालय द्वारा पूरे वैंटिलेटर की खरीद पर की गई राशि के समान है । निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया है कि आज भी उक्त वैंटिलेटर का मूल्य GeM Portal पर 10.30 लाख रूपये है और जो वैंटिलेटर विभाग को दिए गए उनसे
निम्नलिखित चीजें शामिल थीं:-
मूल उपकरण
मैडिकल एयर प्रोसेसर
बेसिक एसेसरीज
एडल्ट/पीडियार्दिक / नियो नेटल इप्लिकेशन एसेसरीज
ऑप्शनल एसेसरीज
ETCO 2 एप्लिकेशन असेसरीज
SPO 2 एप्लिकेशन एसेसरीज
हयुमिडिफायर
(पांच साल की वारंटी)
अतः प्रारम्भिक तौर पर स्वास्थ्य निदेशालय में वैंटिलेटरों को कय करने की प्रकरिया में कोई अनियमितताएं नहीं पाई गई हैं । फिर भी पारदर्शिता के हित में यह निर्णय लिया गया है कि इस मामले में निदेशक उद्योग व नियन्त्रक स्टोर की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया जाए जिसमें निदेशक, चिकित्सा शिक्षा, प्रधानाचार्य आईजीएमसी एवं उप नियन्त्रक, वित्त एवं लेखा चिकित्सा, शिक्षा निदेशालय अन्य सदस्य होंगे व यह समिति 10 दिन के भीतर रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत करेगी ।





