शिमलाः हिमाचल प्रदेश में भारी बर्फबारी के बाद लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। राजधानी शिमला सहित अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बर्फबारी के चलते सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। राज्य में बड़े पैमाने पर सैंकड़ों सड़कों के अवरूद्व होने से वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है।
मौसम विभाग के येलो अलर्ट के बीच ऊंचाई वाले भागों में रात से ही बर्फबारी व निचले भागों में बारिश का दौर जारी है। प्रदेश के लाहौल-स्पीति, कुल्लू, किन्नौर, शिमला, सोलन, मंडी, सिरमौर, चंबा और कांगड़ा जिले के ऊंचाई वाले भागों में बर्फबारी रुकने का नाम ही नहीं ले रही।
जलोड़ी दर्रा से लेकर रोहतांग दर्रा, बारालाचा, कुंजुम दर्रा, सोलंगनाला, अटल टनल के साउथ व नोर्थ पोर्टल, मनाली सहित पूरी लाहौल घाटी में एक से तीन फीट तक बर्फबारी हुई है। वहीं, दारचा में रात को दो जगह हिमस्खलन हुआ है। जबकि लाहौल और पांगी-किलाड़ का कुल्लू-मनाली से संपर्क कट गया है। बर्फबारी-बारिश से कुल्लू-लाहौल में 200 सड़कों पर यातायात ठप हो गया है।
जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित हो गया है। कई इलाकों में बिजली नहीं होने से अंधेरा पसरा हुआ है। प्रदेश के कांगड़ा, हमीरपुर, बिलासपुर, सोलन, ऊना, सिरमौर में भी बारिश हो रही है।
राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र की ओर से गुरुवार सुबह जारी रिपोर्ट के अनुसार राज्य में तीन NH व एक स्टेट हाईवे समेत 259 सड़कें यातायात के लिए बंद हैं। शाम तक बंद सड़कों की संख्या और बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसके साथ ही 477 बिजली ट्रांसफार्मर ठप हैं। वहीं, 37 पेयजल योजनाएं भी बाधित हैं।
सबसे ज्यादा सड़कें लाहौल-स्पीति, शिमला और कुल्लू जिले में बंद हैं। प्रदेश में बारिश-बर्फबारी से शीतलहर बढ़ गई है। बर्फबारी वाले इलाकों में लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। शिमला, कुफरी, देहा, नारकंडा और खड़ापत्थर में भारी बर्फबारी से ऊपरी शिमला के लिए यातायात ठप है।
शिमला में भी वाहनों की आवाजाही बंद हो गई है। लक्कड़ बाजार मार्ग सुबह ही बंद हो गया था। बर्फबारी से स्थानीय लोगों के साथ ही पर्यटकों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बसों की आवाजाही ठप होने से लोग पैदल ही अपने गंतव्य तक पहुंचे। पुराना बस अड्डा पर लोग बसों का इंतजार करते रहे। शहर के सर्कुलर रोड पर बर्फबारी से जाम लग गया।
नारकंडा में एनएच-5 और जलोड़ी जोत में 305 हाईवे पर यातायात के लिए बंद है। उधर मंडी जिले के शिकारी देवी, कमरुनाग समेत आसपास की ऊंची पहाड़ियों पर भी बर्फबारी हुई है। वहीं, बर्फबारी व बारिश से किसानों-बागवानों के चेहरे खिल उठे हैं। बागवानी के लिए बर्फबारी संजीवनी मानी जा रही है। इससे सेब के लिए जरूरी चिलिंग आवर्स पूरे होने में मदद मिलेगी।


