सरकाघाट, रितेश चौहान : धर्मपुर में मुख्यमंत्री की शह पर लोकतंत्र की हत्या की जा रही है। जलशक्ति मंत्री खराब सेहत का बहाना बनाकर सरकारी समारोहों में अपने पुत्र को मुख्यातिथि बनाकर भेज रहे हैं। यह आरोप मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की लोकल कमेटी ने लगाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि एक मंत्री सरकारी कायदे कानून को ठेंगे पर रखकर अपने पुत्र से विधायकी करवा रहे है और मुख्यमंत्री मौनी बाबा बने हुए है।
कमेटी का कहना है कि जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह के बेटे को किस आधार पर सरकारी विभागों व स्कूलों के समारोहों में मुख्य अतिथि बनाया जा रहा है। मंत्री द्वारा इसके लिए विभागों पर अनधिकृत दबाब बनाया जा रहा है। पार्टी के सचिव व पूर्व जिला परिषद सदस्य भूपेंद्र सिंह ने बताया कि दो दिन पहले 12वीं स्कूल संधोल में एनएसएस के शिविर के समापन और पिछले कल धर्मपुर के कलस्वाई स्कूल की प्रबधन कमेटियों ने मंत्री के बेटे को मुख्यतिथि बनाया था।
उन्होंने बताया कि संधोल जिला परिषद वार्ड की पार्षद व अन्य चुने हुए प्रतिनिधि और धर्मपुर में प्रिंसिपल व अन्य कर्मचारी मंत्री के बेटे के स्वागत के लिए कतारों में खड़े होकर फूल के गुदस्ते व मालाएं डालने के लिए तैनात किए गए थे।
उन्होंने कहा कि मंत्री वर्तमान सरकार में अपनी हैसियत का नाजायज फायदा उठा कर बेटे को इस वर्ष होने वाले चुनावों के लिए ट्रेंनिग देने में लगे हुए हैं। अपने स्थान पर बेटे से ही अघोषित तौर पर “विधायिकी” शुरू करवा दी है। इस तरह धर्मपुर में जलशक्ति मंत्री और उनके बेटे द्धारा सरेआम सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है।
लेकिन उन्हें ऐसा करने से रोकने वाला कोई नहीं है क्योंकि मुख्यमंत्री को भी अपने इस मंत्री को टोकने और रोकने की हिम्मत नहीं है। भूपेंद्र सिंह ने कहा कि ये बहुत ही निंदनीय है कि मंत्री का बेटा जो न तो कोई चुना नुमाइंदा है और न ही सरकार में कोई पद उनके पास है। बाबजूद इसके वही सब जगह पर मुख्यथि बनाया जा रहा है।
जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह के बेटे की गैरसरकारी संस्था सहारा फाउंडेशन ने दो दिन पहले ही संधोल में 14 पंचायतों की सैंकड़ों महिलाओं को समानित करने के बहाने इकठ्ठा किया था जिसमें जलशक्ति मंत्री भी मौजूद थे। भूपेंद्र सिंह ने बताया कि मंत्री के बेटे को अभी से ही अगले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर इस तरह के समारोहों के माध्यम से प्रमोट करने का काम हो रहा है।
बहुत से प्रधानों पर भी मंत्री के बेटे को ही पंचायतों के समारोहों और विभागीय सामग्री वितरण हेतु बुलाने का दबाब है। जिसके कारण बहुत से ग्राम पंचायतों के प्रधान दुविधा में होते हैं कि समारोहों में मंत्री के बेटे को बुलाएं या बेटी को।
हालांकि संधोल में महिला सम्मेलन आयोजित किया गया लेकिन उसमें मंत्री की बेटी और राज्य महिला एवं अधिकारिता विभाग राज्य कमेटी की सदस्य उस समारोह में नदारद रही। जबकि सबंधित विभागीय कमेटी की सदस्य होने के नाते उसका इस समारोह में भाग लेना जायज था।


