शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने आदेशों की अनुपालना न होने पर सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग के सचिव, निदेशक स्वास्थ्य, उपायुक्त शिमला और जिला कल्याण अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय के समक्ष उपस्थित रहने के आदेश दिए हैं।
कोर्ट ने उन्हें यह स्पष्ट करने को कहा है कि कुष्ठ कालोनी फागली शिमला में स्थित कुष्ठ गृह के निरीक्षण और आवश्यक मरम्मत संबंधित आदेशों की अनुपालना क्यों नहीं की जा रही है। 7 जनवरी 2022 को पारित आदेशों के तहत हाईकोर्ट ने फागली स्थित कुष्ठ गृह में मूलभूत के आदेश सुविधाओं की कमी से जुड़े मामले में शिमला को निर्देश दिए थे।
उपायुक्त शिमला को कुष्ठ कालोनी फागली स्थित कुष्ठ रोग गृह का निरीक्षण करने और चार सप्ताह की अवधि के भीतर आवश्यक मरम्मत कार्य करने के आदेश दिए गए थे।
मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने यह आदेश नीरज शाश्वत द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के पश्चात पारित किए गए। याचिका में आरोप लगाया है कि लगभग एक दशक पहले सरकार द्वारा कुष्ठ रोगियों को फागली में एक भवन आवंटित किया था जो अब जर्जर हालत में बदल गया है।
प्रार्थी ने आरोप लगाया है कि तब से राज्य सरकार द्वारा उस भवन का कोई रखरखाव नहीं किया जा रहा। कुष्ठ रोगियों के लिए वहां शौचालय तक नहीं हैं, पानी और बिजली की भी उचित सुविधा नहीं है। खिड़कियां और दरवाजे टूटे हैं, सीवरेज सिस्टम में रिसाव है जिस कारण मरीजों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है।







