हमीरपुर: हमीरपुर के जादूज सिनेमा हॉल में द कश्मीर फाईल्स फिल्म देखने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माता ने बहुत ही संवेदना के साथ कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के साथ हुए अन्याय को फ़िल्म के रूप में पर्दे पर उतारा है। कश्मीरी पंडितों ने घाटी में जो दर्द सहा है यह फिल्म तो उस घटनाक्रम का हिस्सा मात्र है।
प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि इस फिल्म में धारा 370 की सच्चाई को उजागर किया गया है कि किस प्रकार धारा 370 का दुरुपयोग कर कश्मीरी पंडितों पर घाटी में अत्याचार हुए। उन्हें बर्बाद कर दिया गया और उन्हें या तो कश्मीर छोड़ने पर मजबूर किया गया या फिर उन्हें यातनाएं देकर मौत के घाट उतार दिया गया।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी दशकों से घाटी में धारा 370 खत्म करने की मांग उठा रही थी। सन 1953 में पहली बार डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने एक देश एक निशान एक विधान की मांग उठाई थी। सन 1991 में डॉ जोशी ने एकता यात्रा निकाली जिसका हिस्सा हम भी बने थे।
बाद में भाजयुमो ने कोलकाता से लेकर श्रीनगर तक तिरंगा यात्रा निकाली थी। केवल यही नहीं पार्टी कार्यकर्ताओं ने कई बार कश्मीर में उत्पन्न हुई समस्याओं को दूर करने के लिए मांग उठाई है। सन 2019 में जब कश्मीर से धारा 370 खत्म की गई तब वर्षों पूर्व देखा गया स्वप्न पूरा हुआ था।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कश्मीर में केवल मकान बना देने से कश्मीरी पंडितों की वापसी और उनका पुनर्वास संभव नहीं है। वहां पर कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा की जिम्मेदारी होनी चाहिए और वहां का माहौल ऐसा होना चाहिए कि कश्मीरी पंडितों को दोबारा ऐसा अत्याचार ना झेलने पड़े और यह तभी संभव हो पाएगा जब वहां देश भक्ति का भाव पैदा होगा।
सौभाग्य से देश में ऐसी सरकार चल रही है जो इसको लक्ष्य को प्राप्त करने की ओर अग्रसर है और काफी हद तक सफल भी हुई है। हाल ही में जब अलगाववादियों ने ऐलान कर दिया कि कश्मीर में देश का झंडा लहराने वाला कोई नहीं मिलेगा इसके बावजूद कश्मीर की हर पंचायत हर गांव में देश का तिरंगा लहराया था।
पूर्व मुख्यमंत्री ने पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए कहा की कश्मीर में हालात सुधरेंगे और कश्मीरी पंडितों की सकुशल घर वापसी भी होगी और उनका पुनर्वास भी होगा।


