खबरनाउ ब्यूरो: हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी का CGPA कम होने के चलते यूनिवर्सिटी का ग्रेड A बरकरार रहेगा, हालाँकि उम्मीद की जा रही थी कि इस बार NAAC की टीम द्वारा बेहतर CGPA मिलने के बाद यूनिवर्सिटी ए प्लस प्लस ग्रेड की श्रेणी में आ जाएगी। इसके चलते HP युनिवेर्सिटी को UGC से फंड नहीं मिलेगा। दरअसल, नैक की टीम ने यूनिवर्सिटी में छात्रों को सुविधाएं ना मिलने के चलते CGPA को इस बार घटा दिया है। NAAC युनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन की ओर से स्थापित देश में उच्च शिक्षा के संस्थानों को मान्यता देने और उनके आंकलन के लिए बनाई गई स्वायत संस्था जिसका पूरा नाम नेशनल असेसमेंट एंड एक्रिडेशन काउंसिल है। इसका मकसद भारत में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ावा देना है।
गौरतलब है कि साल 2016 में HPU को NAAC ने 3.21 CGPA के साथ ए ग्रेड दिया था, जबकि इस बार ग्रेड तो A बरकरार रखा है, लेकिन CGPA को घटा दिया है। इसका मुख्य कारण कैंपस का विस्तार ना होना, स्टूडेंट्स को प्लेसमेंट व् नौकरी के अवसर कम मिलना, एक्सचेंज प्रोग्राम में कमी और हॉस्टलों तथा शिक्षकों के लिए काउंसिलिंग प्रोग्राम में कमी बताई जा रही है। वहीँ HPU के वीसी प्रो. बंसल का कहना है कि हम लगातार कमियों को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। जाे कमियां रही हैं, उसे दूर करने का प्रयास किया जाएगा। हमने ए ग्रेड को बरकरार रखने में सफलता हासिल की है। जो कमियां हैं, उसमें सुधार होगा।
आपको बता दें कि साल 2003 में युनिवर्सिटी की ओर से नैक की टीम को बुलाया गया और विवि को बी प्लस ग्रेड मिला, जिसके बाद साल 2009 में फिर से नैक की टीम आई लेकिन ग्रेड घटकर बी हो गया। फिर साल 2016 में नैक की टीम ने CGPA 3.21 देकर विवि को ए ग्रेड दिया था।




