मोक्ष शर्मा,शिमला: आदिशक्ति देवी दुर्गा के आभामंडल में दस महाविद्याएं दस प्रकार की शक्तियों की प्रतीक हैं। सृष्टि के कल्याण में इनकी साधना कल्प वृक्ष के समान शीघ्र फलदायक और साधक की सभी कामनाओं को पूर्ण करने में सहायक होती हैं। महाविनाशक महाकाली जहा रक्तबीज का वध करती हैं, वहीं अपने साधकों को अपार शक्ति देकर माँ भगवती सबल और सक्षम बनाती हैं। ऐसी ही शक्तियों की प्रदाता है राजधानी शिमला के उपनगर बालूगंज में विराजमान मां कामनादेवी। कामना देवी मंदिर काली माता को समर्पित एक पवित्र आलौकिक स्थान है। पूरे भारत से बड़ी संख्या में यहां भक्त पहुंचते हैं। जो भी कठिन पहाड़ी रास्ता तय करके मंदिर पहुंचता है उसे मां आशीर्वाद देती हैं और उसकी सभी इच्छाएं पूरी करती हैं। यह पवित्र स्थान शहर से 5 किमी की दूरी पर प्रोस्पेक्ट हिल पर स्थित है। बालूगंज से पैदल पहाड़ चढ़कर यहां पहुंचा जा सकता है। चीड़ और देवदार के घने वृक्ष इस जगह को चारों ओर से घेरे हैं।
क्या है ऐतिहासिक महत्व
शिमला के बालूगंज स्थित कामना मंदिर लगभग 300 वर्ष पुराना है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि ऐतिहासिक एवं पर्यटन की दृष्टि से भी इसका बहुत महत्व है। इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से यहां आता है, देवी उसकी हर मनोकामना पूर्ण करती है। इसलिए श्रद्धालुओं की माता के इस मंदिर में गहन श्रद्धा है। माना जाता है कि यह स्थान पहले क्रेडू नाम से जाना जाता था। यहां पर देवी की पिंडी प्रकट हुई और स्थानीय लोगों ने यहां मंदिर बनवाया। हर इच्छा व कामना पूर्ण करने वाली माता को स्थानीय लोगों ने कामना देवी का नाम दे दिया।
निसंतान को संतान और निर्धन को धन देती हैं कामना देवी
जिन लोगों के संतान न हो वह इस मंदिर में श्रद्धा पूर्वक जाते हैं और मां के मंदिर के बाहर पेड़ में एक सूत्र बांधते हैं जिसके बाद उनकी इच्छा पूर्ण हो जाती है। संतान प्राप्ति के बाद पुन: मंदिर में जाने के बाद इस सूत्र को खोला जाता है। निर्धन को माता के दरबार में धनवान होने का आशीर्वाद मिलता है।

