सवाददाता, भरमौर: हमारे देश के अन्नदाता पिछले 18 दिनों से अपने घर-परिवार व कृषि भूमि से दूर इस कोरोना संकट एवं कड़कड़ाती सर्दी में अपने अधिकारों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार की निरंकुशता के खिलाफ सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं। जिसमें 11 आंदोलनकारी किसान अपने प्राणों की आहुति दे चुके है। बाकि हजारों की तादाद में हमारे किसान भाई 18 दिन से ठंड और बारिश में खुले आसमान के नीचे बैठे हैं, पर सरकार को इनके अधिकारों की कोई चिंता नहीं है।
दूसरी ओर देश के प्रधानमन्त्री माननीय मोदी जी किसानों के प्रति चुपी सादे बैठे है,और अभी तक किसानों के साथ जितनी भी बार्तालाप हुई हैं उनमें एक बार भी शामिल नहीं हुए है। परंतु कोपोरेट सेक्टर के अपने चेहते अंबानी के पोते को देखने के लिए मोदी साहब हॉस्पिटल पहुंच गए थे, लेकिन किसानों से मिलने का समय अभी तक नहीं मिला। इससे यह साफ पता चल रहा है, कि मोदी सरकार की किसानों के प्रति क्या सोच रखती है, इसलिए मोदी सरकार ने रात के अंधेरे में और चोरी छिपे बिना संसद में वहस किये , किसान संगठनों की गैर मौजूदगी में, किसानों पर थोपे गये तीन काले बिल को संसद में पास किया, ताकि वो सिर्फ और सिर्फ कोपोरेट सेक्टर,पुजीपतियों को फायदा पहुँचा सके।
जिससे पूजीपति घराना अपनी मनमानी से फसल खरीद कर बाजार में महगें दामों में बेच सके,और किसान सिर्फ खेतों में लगा रहे, चंद पैसों की सहायता जो भाजपा पार्टी को फड़ के रूप में मिल रहा हैं इन अरबपतिओं से उसके लिए देश के हर सेक्टर को अपने चेहते पुजीपतिओं को बेचा जा रहा हैं, जो देश के लिए दुर्भाग्य की बात हैं, और आगे आने बाली पीढ़ियों को खामयाजा भुगतना पड़ सकता हैं।
भाजपा सरकार को अपनी हठ धर्मिता त्याग कर किसानों की मांगों को जल्द पूर्ण करना चाहिए, सरकार कान खोल कर सुन लें यह उसी पजाब हरियाणा के किसान भाई हैं, जो देश के किसी भी राज्य में संकट या आपदा आये पहले पजाब ही आगे आता हैं, मोदी सरकार अपनी वाह वाही के लिए अन्नदाताओं के अधिकारों को न दबाएं।


