पूनम मेहता, शिमला: हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज चुनावों का बिगुल बज चुका है। वहीं ऐसे समय पर देश के प्रथम मतदाता श्याम शरण नेगी को लोग याद करना नहीं भूलते हैं। चूड़ियों से भरा चेहरा और कमजोर शरीर, छड़ी के बिना दो कदम चल भी नहीं सकते कुछ कदम चलने के बाद उन्हें लंबी सांस लेनी पड़ती है।
किन्नौर जिला के कल्पा गांव में देंगे मतदान
शिमला से करीब 280 किलोमीटर दूर किन्नौर जिला के खूबसूरत गांव कल्पा में 1917 में उनका जन्म हुआ था। नेगी इस बार भी पंचायती राज चुनाव में अपने गृह क्षेत्र कल्पा में मतदान करेंगे। 103 साल के श्याम सरण नेगी यहीं अपने पुश्तैनी घर पर रहते हैं।
नेगी चुनाव में भाग लेने के लिए उत्साहित
103 साल के श्याम सरन नेगी, अपनी उम्र और शारीरिक तक़लीफों के बावजूद एक बार फिर से पंचायती राज चुनावों में भाग लेने को उत्साहित हैं। स्वतंत्र भारत के पहले मतदाता के तौर पर मशहूर नेगी को भारतीय लोकतंत्र का लीविंग लीजेंड भी कहा जाता है।
आज तक एक भी चुनाव नहीं किया मिस
अपनी क्षीण आवाज़ में नेगी याद करते हैं कि अक्तूबर 1951 में मैंने पहली बार संसदीय चुनाव में वोट डाला था, इसके बाद मैंने एक भी चुनाव मिस नहीं किया। मैं अपने वोट की अहमियत को जानता हूं। अब तो मेरा शरीर भी साथ नहीं दे रहा है, लेकिन आत्मशक्ति के चलते मैं वोट देने जाता रहा हूं। इस बार भी मताधिकार का इस्तेमाल करना है। हो सकता है कि ये मेरा आख़िरी चुनाव हो यह उम्मीद है। “जिसे मैं अपने जीवन के अंतिम चरण में छोड़ना नहीं चाहता।”


