चंडीगढ़: आई.टी. के युग ने किताबों का स्वरूप भी बदला है। और ई-बुक्स ने भी लोगों के बीच जगह बनाई है। लेकिन किसी किताब को पढ़ने का मजा जो ऑरिजनल फॉर्म में है, वह इलैक्ट्रॉनिक में नहीं। हालांकि इसमें अलग-अलग लोगों की अलग-अलग पसंद है। नीलिमा चड्ढा पी.जी.आई. तुलसी दास लाइब्रेरी की सीनियर लाइब्रेरियन के पद से सेवानिवृत्त हो गई है और अपने सीनियर लाइब्रेरियन के तौर पर अनुभव करते हुए बताती हैं मैंने 31 साल से ज्यादा पी.जी.आई. की लाइब्रेरी में काम किया है। इलैक्ट्रॉनिक की बात ने फोन अगर इस फील्ड में करूं तो कह सकती हूं कि यह इसकी जरूरत है। जब मैंने -अपने ज्वाइन किया था तो बिल्कुल पारंपरिक सविता लाइब्रेरी हुआ करती थी रिसर्च ब्लॉक जाने में 1 90 और 2000 के समय कप्यूटर का दौर जब शुरू हुआ और साल 2010 तक लाइब्रेरी में चीजें बदल रही थीं। और अब सब कुछ आपकी नौच उंगलियों पर है। दुनिया भर के जर्नल्स, तर रिसर्च पेपर्स, डाटा को स्टोर करना अब नी आसान हो गया है।
डिजीटलाइजेशन ऑफ थीसिस वर्क होगा शुरू
पी.जी.आई. लाइब्रेरी में जल्द ही डिजीटलाइजेशन ऑफ थीसिस वर्क का नया प्रोजेक्ट शुरू होने जा रहा है। नीलिमा ने बताया कि यह उनके एक ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक है। कोविड की वजह से इसका काम रुक गया था लेकिन जल्द ही पी.जी.आई. की तुलसी दास लाइब्रेरी में यह शुरू होने जा रहा है। इसके शुरू होने से रिसर्च वर्क को एक बड़ा विस्तार मिलेगा पी.जी.आई. डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टाफ और स्टूडेंट्स ग्लोबल लैवल पर अपने रिसर्च वर्क को बढ़ा सकते है किस देश में और कहां, कैसा रिसर्च वर्क चल रहा है, इसकी जानकारी मिलनी आसान हो जाएगी। प्रिंट को कुछ ही लोग पढ़ पाते है, उसका एक्सैस इतना ज्यादा नहीं होता लेकिन इसकी मदद से एक साथ कई लोग इसका फायदा उठा सकेंगे। आज की तारीख में पी.जी.आई. लाइब्रेरी में एक लाख बुक्स और जर्नल प्रिंट में हमारे पास मौजूद हैं। एडवांस चीजों को रिसर्च व
मैंने अपने कार्यकाल में वैबीनार करवाने शुरू किए। हम उन एडवांस चीजों को रिसर्च और यूजर्स के पास पहुंचा रहे थे, जो हम लाइब्रेरी में इस्तेमाल करते हैं। रिसर्च सॉफ्टवेयर जो आपको अपने रिसर्च के बारे में बहुत कुछ बताता है कि कैसे एक अच्छी रिसर्च होनी चाहिए। पेलजरिजम सॉफ्टवेयर पी.जी.आई. के पास है।
डाटा चोरी की अब कोई गुंजाइश ही नहीं है। बिब्लोग्राफी जो पहले मैनुअल बनती थी. अब सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल इसमें किया जाता है। हमने कई ऐसे सॉफ्टवेयर भी इंस्टाल करवाए हैं, जो न सिर्फ आपको रिसर्च वर्क करने में मदद करता है बल्कि यह भी बताता है कि किस हाई जर्नल में आपको अपना रिसर्च पब्लिश करना चाहिए।
नीलिमा ने बताया कि मैनुअली टू इलेक्ट्रॉनिक की यह यात्रा उनके लिए भी एक लर्निंग पीरियड रहा। मुझे नया सीखना और पढ़ना अच्छा लगता है। मेरा यह पैशन है। ये बदलाव जो आए हैं. इसमें सबका रोल है।
मेरी पूरी टीम. एम. एस. का बहुत सपोर्ट हमेशा रहा जिनकी वजह से हम इस लैवल पर पहुंच पाए हैं। साल 2019 एम.एल.ए.आई. ने जब दी बेस्ट फीमेल मैडीकल लाइब्रेरियन अवार्ड दिया तो वह मेरे लिए बहुत यादगार पल था।

