शिमला: शिक्षा और प्रशिक्षण की राह पर महाविद्यालयों की भूमिका बेहद अहम रही है। महाविद्यालय न केवल व्यक्ति को व्यवसायिक प्रशिक्षण देने के संस्थान हैं, इससे भी अधिक महाविद्यालय ज्ञान वर्धन व चारित्रिक निर्माण के द्वारा नव पढ़ी की दिशा तय करने के भी केन्द्र बन सकते हैं। और यहां महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं महाविद्यालय में होने वाले वो कार्यक्रम और संगोष्ठीयां जिनके द्वारा छात्रों का नए तथ्य विचारों और नए नजरिए से तारूफ होता है। राजकीय महाविद्यालय संजौली में 27 और 28 अगस्त 2021 को ‘स्त्री-विरुद्ध अपराध: देवी अस्मिता का खंडन’ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। इसमें उत्तरी भारत के विद्वान, प्राध्यापक एवं शोधकर्ता पत्र वाचन करेंगे।
महाविद्यालय के अकादमिक विकास के लिए ऐसे कार्यक्रम महत्वपूर्ण: डॉ. सी० बी० मेहता
प्राचार्य डॉ. सी० बी० मेहता के अनुसार करीब दो वर्षों के लम्बे अन्तराल के बाद इस तरह का बड़ा कार्यक्रम हो रहा है, जो महाविद्यालय में अकादमिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उनके अनुसार दो दिनों तक अलग-अलग कक्ष में पत्र वाचन होगा और पूरे आयोजन में कोविड नियमों की अनुपालना की जाएगी। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में सांध्य महाविद्यालय में प्राचार्य प्रोफेसर मीनासी पॉल, एस०पी० सौम्या साम्बासीवन, प्रोफेसर मंजू जैदका, प्रोफेसर रेशन शर्मा और प्रोफेसर पूजा प्रियंवादा मुख्य वक्ता होंगे, जो संगोष्ठी के आधार विषय को विभिन्न प्रतिमानों और अवधारणाओं के साथ स्पष्ट करते हुए व्याख्यान देंगे। उसके उपरान्त तकनीकी सत्रों में सम्बन्धित विषयों पर उपस्थित प्रतिभागी पत्र प्रस्तुत करेंगे। दूसरे दिन प्रथम सत्र में प्रतिभागियों का पत्र वाचन तथा दोपहर बाद समापन कार्यक्रम होगा, जिसमें संगोष्ठी के निष्कर्ष के साथ पूरा विवरण प्रस्तुत किया जाएगा। समापन कार्यक्रम में महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ डेज़ी ठाकुर बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करेंगी।

