शिमला: हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा प्राप्त करना अब दृष्टिबाधित एवं अन्य दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए और अधिक सुगम होने वाला है। विश्वविद्यालय में कुलपति के अधीन विश्वविद्यालय परिसर को दृष्टिबाधित एवं अन्य दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सुगम करने के काम शुरू किए गए हैं और इस दिशा में किए जा रहे विशेष प्रयासों के परिणाम जमीन पर नजर भी आने लगे हैं। विश्वविद्यालय में पहली बार बड़ी संख्या में दिव्यांग विद्यार्थी निशुल्क पढ़ रहे हैं और इनमें कम से कम 15 छात्र तो पीएचडी कर रहे हैं। अनेक तो ऐसे हैं जिन्होंने ने जेआरएफ, नेट और सेट पास किया है।
कुलपति की पहल पर विश्वविद्यालय परिसर को बाधा रहित बनाने के लिए लगभग पांच करोड़ रुपए की लागत से शुरू हुए प्रोजेक्ट के पहले चरण में एक लिफ्ट बन चुकी है, सात लिफ्ट और कई रैम्प बनाने का कार्य जोरों पर चल रहा है और इसके अलावा कुछ शौचालयों को भी बाधारहित बनाया जाएगा। प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में भी लिफ्ट और रैंप बनाए जाएंगे।
प्रो. सिकंदर कुमार के आने के बाद विश्वविद्यालय में प्रत्येक विषय में एमफिल और पीएचडी में हर वर्ष सीधे प्रवेश के जरिए एक सीट दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए आरक्षित कर दी गई है जो सुविधा किसी ए विश्वविद्यालय में नहीं है। इसके अलावा शेष कक्षाओं में दाखिलों में 5% आरक्षण भी लागू किया गया है। जहां एक ओर विश्वविद्यालय का पोर्टल दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए पूरी तरह से एक्सेसिबिल कर दिया गया है तो वहीं दृष्टिबाधित एवं हाथ से लिख पाने में असमर्थ विद्यार्थियों के लिए राइटर की सुविधा उपलब्ध करना भी आसान बनाया गया है। यूजीसी और राज्य सरकार के दिशा निर्देशों का पालन करते हुए अब पात्र दिव्यांग विद्यार्थी किसी भी शैक्षणिक योग्यता वाले व्यक्ति को अपना राइटर बना सकते हैं।दिव्यांग विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के हॉस्टलों से कैंपस तक लाने और वापस छोड़ने के लिए विशेष वैन की व्यवस्था की गई है। विश्वविद्यालय की बस सेवा उनके लिए मुफ्त है। विश्वविद्यालय के सभी दिव्यांग विद्यार्थियों को राज्य सरकार के माध्यम से छात्रवृत्ति भी दी जाती है।

दिव्यांग विद्यार्थियों के अधिकारों के संरक्षण लिए विश्वविद्यालय प्रतिबद्ध: प्रो. सिकंदर कुमार
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सिकंदर कुमार का कहना है कि पिछले 3 वर्षों में विश्वविद्यालय में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए विभिन्न प्रकार के काम किए गए हैं। इस दिशा में बात विश्वविद्यालय में दिव्यांगों के लिए सुगम्य पुस्तकालय की स्थापना की करें या एमफिल और पीएचडी के प्रत्येक विषय में दिव्यांगों के लिए एक सीट आरक्षित करने की। इन सभी व्यवस्था होने दिव्यांग बच्चों के लिए उच्च शिक्षा को सुगम किया है। उन्होंने कहा कि अब हम विश्वविद्यालय परिसर में दिव्यांग छात्रों के लिए लिफ्ट और रैंप जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध करवाने जा रहे हैं। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सिकंदर कुमार का कहना है कि दिव्यांगता कोई अभिशाप नहीं है। दिव्यांग विद्यार्थियों के अधिकारों के संरक्षण लिए विश्वविद्यालय प्रतिबद्ध है।
विशेष रूप से दिव्यांगों के लिए बनाई गई एक नई सुगम्य लाइब्रेरी: अजय श्रीवास्तव, नोडल अधिकारी विकलांगता मामले
विकलांगता मामलों के नोडल अधिकारी और विश्वविद्यालय में हो रहे इन कामों में विशेष योगदान देने वाले अजय श्रीवास्तव बताते हैं, 2 वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने दृष्टिबाधित एवं दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए एक नई सुगम्य लाइब्रेरी का उद्घाटन किया था। इसके 17 कंप्यूटरों में विभिन्न प्रकार के टॉकिंग सॉफ्टवेयर हैं जिनके जरिए दृष्टिबाधित विद्यार्थी सुनकर ऑनलाइन एवं प्रिंटेड पुस्तकें पढ़ते हैं।

