धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश में विधायकों को झंडी देने का मुद्दा फिर से विधानसभा में गूंजा है। धर्मशाला के तपोवन स्थित विधानसभा में किन्नौर से कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी ने ये मुद्दा उठाया। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान नेगी ने सदन में कहा कि प्रदेश में मुख्य सचिव, जिला परिषद, सचिवों, कुलपतियों को वाहनों में झंडी लगाने की अनुमति है लेकिन विधायकों को नहीं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में विधायक संस्था लगातार कमजोर हो रही है, विधायकों की संस्था को बचाने के लिए सदन में पक्ष और विपक्ष दोनों को मिल बैठकर सोचना होगा। कांग्रेस विधायक ने प्रदेश के विधायकों को सरकारी विश्राम गृहों में कार्यालय मुहैया करवाने की पैरवी भी की।
उन्होंने कहा कि चुनाव लोकतंत्र का हिस्सा है, विधायक अपने-अपने क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन विडंबना यह है कि लोकतंत्र में विधायक की संस्था कमजोर हो रही है। इन्हें डीसी और मंत्रियों के कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं। विधायक की भूमिका क्या हो, इस पर चिंतन की आवश्यकता है।
नेगी ने कहा कि वार्ड का चुनाव तक न जीत पाने वाले नेता अध्यक्ष और उपाध्यक्ष तक बनाए जाते हैं, इनके नाम शिलान्यास व उद्घाटन की पट्टिकाओं पर लगते हैं, लेकिन विधायकों के नहीं।
जगत सिंह नेगी ने कहा कि सूचना के अभाव में विधायकों को आरटीआई के तहत जानकारी लेनी पड़ती है। अगर शिलान्यासों पर विधायकों के नाम नहीं लगाए जा सकते तो इस प्रथा को बंद कर देना चाहिए।
वहीं, उन्होंने कहा कि विधानसभा में किसी भी कानून पर संशोधन लाने से पहले विधायकों की राय ली जानी चाहिए। जगत सिंह नेगी ने विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार से विधायकों को झंडी देने के मामले में जल्द फैसला लेने की बात कही है।







