स्पेशल डेस्क: नए साल से पहले मनाए जाने वाले क्रिसमस के त्योहार को लेकर लोग काफी उत्साहित रहते हैं। देश-विदेश में क्रिसमस के अवसर पर जश्न देखने को मिलता है। लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि आखिर 25 दिसंबर को ही क्रिसमस का त्योहार क्यों मनाया जाता है।
25 दिसंबर को ही क्यों मनाया जाता है क्रिसमस?
दुनियाभर में हर साल 25 दिसंबर क्रिसमस डे के रूप में मनाया जाता है। ये ईसाई धर्म का सबसे बड़ा त्योहार है। हर साल ईसा मसीह के जन्म दिन के रूप में क्रिसमस का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन ईसाई धर्म के लोग ईसा मसीह यानी जीसस क्रिस्ट को ईश्वर का पुत्र (Son of God) मानते हैं।
क्रिसमस के त्योहार की तैयारियां कई दिन पहले से ही शुरू हो जाती हैं। इस पर्व पर लोग रंग-बिरंगी लाइटों, डेकोरेटिव आइटम्स से अपने घरों को सजाते हैं। इस त्योहर पर क्रिश्चियन लोग खास तौर पर क्रिसमस ट्री को सजाते हैं, क्योंकि क्रिसमस पर क्रिसमस ट्री का भी खास महत्व होता है। यही कारण है कि क्रिसमस ट्री के बिना क्रिसमस का त्योहार अधूरा रहता है।
क्रिसमस ट्री का महत्व
क्रिसमस ट्री (Christmas Tree) की अपनी ही एक खासियत है। यीशू के जन्म के मौके पर एक फर के पेड़ को सजाया गया था, जिसे बाद में क्रिसमस ट्री कहा जाने लगा। इसके अलावा एक और परंपरा क्रिसमस के मौके पर कार्ड देने की है। इस दिन लोग एक कार्ड के जरिए अपनों को शुभकामनाएं देते हैं। बता दें कि पहला क्रिसमस कार्ड (Christmas Card) 1842 में विलियम एंगले ने भेजा था।
क्रिसमस को खास बनाती हैं परंपराएं
क्रिसमस को खास उसकी परम्पराएं बनाती हैं। इनमें एक संता निकोलस (Sant Nicolas) हैं, जिनका जन्म ईसा मसीह की मृत्यु के लगभग 280 साल बाद मायरा में हुआ था। उन्होंने अपना पूरा जीवन यीशू को समर्पित कर दिया। उन्हें लोगों की मदद करना बेहद पसंद था। यही वजह है कि वो यीशू के जन्मदिन के मौके पर रात के अंधेरे में बच्चों को गिफ्ट दिया करते थे।
तोहफे के तौर पर बांटते थे खुशियां “सांता क्लॉज”
वे चाहते थे कि क्रिसमस और नए साल के दिन गरीब-अमीर सभी खुश रहें। संत निकोलस को बच्चों से ख़ास लगाव था। ईसा मसीह के जन्मदिन पर वे किसी को दुखी नहीं देख सकते थे। इसलिए क्रिसमस के दिन वे लोगों को तोहफे के तौर पर खुशियां बांटने निकल पड़ते थे। गरीबों के घर जाकर वे खानपान की सामग्री एवं बच्चों के लिये खिलौने बांटा करते थे।
जानिए संत निकोलस सांता क्लॉज के नाम से कैसे हुए मशहूर
संत निकोलस अपने उपहार आधी रात को ही देते थे क्योंकि उन्हें उपहार देते हुए नजर आना पसंद नहीं था। इसी कारण बच्चों को जल्दी सुला दिया जाता। उनकी इस उदारता के कारण निकोलस को संत कहा जाने लगा। संत निकोलस की मृत्यु के बाद वेश बदलकर सांता बनना, गरीबों और बच्चों को उपहार देने की एक प्रथा सी बन गई। बाद में यही संत निकोलस सांता क्लॉज के नाम से मशहूर हो गए।
पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है क्रिसमस
इस वजह से बच्चे आज भी अपने संता का इंतजार करते हैं। यह नया नाम डेनमार्क वासियों की देन है। यूं तो क्रिसमस ईसाई धर्म को मानने वाले लोगों का त्योहार है। लेकिन अन्य धर्म के लोग भी पूरे उत्साह के साथ क्रिसमस का जश्न मनाते हैं।


