बिलासपुर: देश के लिए शहीद हुए 22 साल के सैनिक अंकेश भारद्धाज को हजारों नम आंखों ने रविवार को घुमारवीं के सेऊ गांव में अंतिम विदाई दी। माता-पिता ने शहीद बेटे को सेहरा और नोटों का हार पहनाकर बैंड-बाजे के साथ दूल्हे की तरह अंतिम यात्रा पर विदा किया। पार्थिव शरीर सुबह लगभग 10 बजे के करीब घर में पहुंचा। घर में आते ही वहां शहीद अंकेश भारद्वाज अमर रहे के नारे लगने लगे।
अंतिम विदाई के लिए दुल्हन की तरह सजा घर
शहीद अंकेश की पार्थिव देह के घर पहुंचने से पहले पूरे घर में राष्ट्रीय ध्वज लगाने के साथ-साथ घर को शादी समारोह की तरह सजाया गया था। शहीद अंकेश के स्वागत में जिले के युवाओं ने तरघेल से घर तक बाइक रैली निकाली। वहीं दधोल से सेऊ गांव तक पैदल तीन किलोमीटर 300 फीट लंबे तिरंगे के साथ यात्रा निकाली। इस तिरंगा यात्रा में क्षेत्र के बच्चे, बूढ़े और महिलाएं शामिल हुईं। तिरंगे के साथ शान से शहीद को उसके आंगन तक पहुंचाया गया।
राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
छोटे भाई आकाश भारद्वाज ने अंकेश को मुखाग्नि दी। 11वीं कक्षा में पढ़ने वाला आकाश भाई को अपना आदर्श मानते हुए सेना में जाना चाहता है। अंकेश की पार्थिव देह को राजकीय सम्मान के साथ घर से एक किलोमीटर आगे मुक्तिधाम तक खुली जिप्सी में ले जाया गया। रास्ते में लोगों ने पुष्पवर्षा कर अंकेश अमर रहे के नारे लगाकर उन्हें अलविदा कहा। शहीद की मां और अन्य महिलाएं भी मुक्तिधाम (शमशानघाट) तक शहीद को छोड़ने गईं।
मां को बेटे की शहादत पर गर्व
मां भी बेटे की शहादत पर गर्व महसूस कर रही थी। बोली, बेटा शेर की तरह आया था, शेर की तरह चला गया। बता दें कि अरुणांचल प्रदेश में बर्फीले तूफान की चपेट में आने से हिमाचल के बिलासपुर जिला के घुमारवीं उपमंडल के सेऊं गांव का अंकेश शहीद हो गया था।







